देहरादून। कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा किए गए धरने और प्रदर्शन के विरोध में आज तक भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने देशव्यापी प्रदर्शन किया है। इसी कड़ी में राजधानी देहरादून मे भारतीय जनता पार्टी महानगर द्वारा कांग्रेस भवन घेराव का कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह विरोध प्रदर्शन नई दिल्ली में राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास के बाहर किए गए प्रदर्शन और धरने के विरोध में था। इस घेराव कार्यक्रम और रैली का नेतृत्व भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट और अन्य वरिष्ठ नेताओं द्वारा किया गया। भाजपा कार्यकर्ता देहरादून स्थित महानगर कार्यालय से एकत्रित होकर कांग्रेस मुख्यालय कांग्रेस भवन, राजपुर रोड की ओर कूच करने के लिए निकले। इस दौरान बड़ी संख्या में कार्यकर्ता कांग्रेस के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। कांग्रेस मुख्यालय तक पहुँचने से पहले ही पुलिस द्वारा कड़े सुरक्षा प्रबंध किए गए और बैरिकेडिंग लगाकर भाजपा कार्यकर्ताओं को रोक दिया गया। प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के नेतृत्व में निकले कार्यकर्ताओं को पुलिस ने कांग्रेस मुख्यालय से पहले बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया। इस दौरान नारेबाजी भी हुई। भाजपा ने कांग्रेस के विरोध-प्रदर्शन को राजनीतिक नौटंकी और संवैधानिक अधिकारों का दुरुपयोग करार दिया। बीजेपी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस प्रदेश में अराजकता फैलाने और जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रही है। इस दौरान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट का कहना था की कांग्रेस की अराजक और गैर-जिम्मेदार राजनीति के विरुद्ध आज देहरादून में भाजपा पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों एवं कार्यकर्ताओं के साथ देहरादून महानगर कार्यालय से कांग्रेस कार्यालय तक विरोध-प्रदर्शन कर अपना रोष व्यक्त किया। प्रधानमंत्री के आवास के समीप हंगामा, अराजकता और अशांति फैलाने का प्रयास किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं किया जा सकता है। कांग्रेस ने बार-बार लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक मर्यादाओं की अनदेखी की है। जब भी उसे अवसर मिला, उसने लोकतंत्र की गरिमा को ठेस पहुँचाने का प्रयास किया है।
भाजपा कार्यकर्ताओं ने शांतिपूर्ण, अनुशासित एवं लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध दर्ज कराते हुए स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में असहमति और विरोध का अधिकार सभी को है, किंतु लोकतांत्रिक संस्थाओं, संवैधानिक मर्यादाओं तथा संसद की गरिमा का अपमान किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकता।
लोकतंत्र में विरोध और अराजकता के बीच स्पष्ट अंतर होता है। स्वस्थ लोकतंत्र संवाद, संयम और संवैधानिक मूल्यों के सम्मान से चलता है, न कि अव्यवस्था और गैर-जिम्मेदाराना आचरण से। नेता प्रतिपक्ष जैसा अत्यंत गरिमामय एवं जिम्मेदार पद भी यदि गंभीरता और मर्यादा के साथ निर्वहन न किया जाए, तो यह लोकतांत्रिक परंपराओं को कमजोर करने का कार्य करता है। राहुल गांधी का व्यवहार इस गंभीर पद की गरिमा के अनुरूप नहीं दिखाई देता।




