26.4 C
Dehradun
Friday, April 17, 2026


spot_img

राज्यपाल ने नॉर्थ जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस में किया प्रतिभाग

देहरादून। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा), नई दिल्ली के तत्वाधान में उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, नैनीताल द्वारा आयोजित दो दिवसीय नॉर्थ ज़ोन रीजनल कॉन्फ्रेंस का आज देहरादून में दिनांक 12 अप्रैल 2026 को भव्य समापन हुआ। इस वर्ष सम्मेलन का विषय “Enhancing Access to Justice” तथा मुख्य थीम “Justice Beyond Barriers: Rights, Rehabilitation & Reform for the Most Vulnerable” रही।  इस सम्मेलन के समापन के अवसर पर  राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि), माननीय भारत के मुख्य न्यायाधीश एवं नालसा के संरक्षक-प्रधान न्यायमूर्ति श्री सूर्यकांत, मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी, केन्द्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री अर्जुन राम मेघवाल सहित उच्चतम न्यायालय एवं उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय के माननीय न्यायमूर्तिगण, उत्तर भारत के विभिन्न उच्च न्यायालयों से पधारे माननीय न्यायमूर्तिगण और विधि विशेषज्ञों ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं राष्ट्रगान के साथ हुआ। उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय के माननीय मुख्य न्यायाधीश श्री मनोज कुमार गुप्ता द्वारा स्वागत संबोधन प्रस्तुत किया गया तथा विभिन्न गणमान्य अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। सम्मेलन में उत्तराखण्ड राज्य के समस्त जनपदों के जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों के अध्यक्ष, सचिव एवं न्यायिक अधिकारियों ने सक्रिय सहभागिता की। विभिन्न तकनीकी सत्रों के माध्यम से न्याय तक पहुँच को सशक्त बनाने, वंचित वर्गों के अधिकारों के संरक्षण तथा न्याय प्रणाली को अधिक प्रभावी एवं सुलभ बनाने पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया। सम्मेलन के दौरान वन अधिकार अधिनियम, 2006 के प्रभावी क्रियान्वयन, जेल सुधार, विचाराधीन बंदियों के अधिकार, एसिड अटैक पीड़ितों के पुनर्वास एवं महिलाओं व बच्चों के विधिक अधिकारों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। इस अवसर पर माननीय भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा “न्याय मित्र पोर्टल” का शुभारंभ किया गया, जिससे आमजन ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर त्वरित न्याय प्राप्त कर सकेंगे। नालसा के कार्यकारी अध्यक्ष न्यायमूर्ति श्री विक्रम नाथ द्वारा ई-बुकलेट का विमोचन भी किया गया। समापन कार्यक्रम में अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि “न्याय तक पहुँच को आसान बनाना” केवल विधिक व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा और संवैधानिक प्रतिबद्धता का आधार है। उन्होंने कहा कि न्याय तभी सार्थक है, जब वह सुलभ, समयबद्ध और किफायती हो, अन्यथा विलंबित या महँगा न्याय अपने वास्तविक उद्देश्य को खो देता है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक के लिए न्याय तक समान पहुँच सुनिश्चित करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। राज्यपाल ने उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यों की सराहना करते हुए ‘मुकदमेबाजी-मुक्त ग्राम’ पहल और ‘एक गाँव-एक निःशुल्क विधि सेवा’ अभियान को उल्लेखनीय बताया। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों से न्याय को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने में सफलता मिली है। राज्यपाल ने कहा कि न्याय तक पहुँच सुनिश्चित करना न्यायपालिका, कार्यपालिका, विधायिका एवं समाज सभी की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस सम्मेलन में हुए विचार-विमर्श से देश की न्याय प्रणाली को और अधिक सशक्त, पारदर्शी एवं समावेशी बनाने में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा। राज्यपाल  द्वारा एंटी-ड्रग जागरूकता वीडियो का शुभारंभ करते हुए युवाओं को नशे के दुष्प्रभाव से बचाने हेतु किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला गया। सम्मेलन में लोक अदालत, मध्यस्थता, नालसा पोर्टल एवं हेल्पलाइन सेवाओं के माध्यम से न्याय को आमजन तक पहुँचाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को रेखांकित किया गया। इसके अतिरिक्त, दूरस्थ क्षेत्रों में विधिक सेवाओं की पहुँच सुनिश्चित करने हेतु उत्तराखण्ड राज्य के समस्त जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों के लिए यूटिलिटी वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। यह सम्मेलन न्याय व्यवस्था को अधिक समावेशी, सुलभ एवं मानव-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुआ है, जो समाज के वंचित एवं कमजोर वर्गों तक न्याय की प्रभावी पहुँच सुनिश्चित करने के उद्देश्य को सुदृढ़ करता है।

 

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

spot_img
spot_img

Stay Connected

22,024FansLike
0FollowersFollow
0SubscribersSubscribe

Latest Articles

- Advertisement -spot_img
error: Content is protected !!