26 C
Dehradun
Wednesday, June 17, 2026


spot_img

पूरी तरह हाथ से लिखा गया था स्वतंत्र भारत का मूल संविधान

संदीप गोयल/एस.के.एम. न्यूज़ सर्विस

देहरादून। स्वतंत्र भारत का मूल संविधान किसी टाइपराइटर या मशीन से नहीं, बल्कि पूरी तरह से हाथ से लिखा गया था। अंग्रेजी और हिंदी दोनों संस्करणों को बेहतरीन सुलेख शैली में तैयार किया गया था।  इसमें 90,000 शब्द थे। स्वतंत्र भारत का मूल संविधान पूरी तरह से हाथ से लिखा गया था, जिसे मशहूर सुलेखक प्रेम बिहारी नारायण रायज़ादा ने बेहद खूबसूरत शैली में लिखा था। प्रेम बिहारी नारायण रायजादा (सक्सेना) ने इसे एक प्रवाहित इटैलिक शैली में लिखा था। उन्होंने इसके लिए कोई पारिश्रमिक नहीं लिया था, बल्कि संविधान के हर पन्ने पर अपना नाम और अंतिम पृष्ठ पर अपने दादा का नाम लिखने की शर्त रखी थी। इस ऐतिहासिक दस्तावेज़ के हर पन्ने को शांति निकेतन के महान कलाकार नंदलाल बोस और उनके साथियों ने भारत की संस्कृति और इतिहास को दर्शाते चित्रों से सजाया था, इसमें भारतीय संविधान की मूल प्रति में सिंधु घाटी सभ्यता से लेकर स्वतंत्रता संग्राम तक के प्रमुख पात्रों को शामिल किया गया है। धार्मिक व दार्शनिक महापुरुषों में भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण, श्रीकृष्ण, भगवान बुद्ध और भगवान महावीर शामिल हैं। ऐतिहासिक व न्यायप्रिय शासकों में सम्राट अशोक, महाराजा विक्रमादित्य, अकबर और चोल राजाओं को जगह मिली है। शौर्य और देशप्रेम के प्रतीक के रूप में छत्रपति शिवाजी महाराज, गुरु गोविंद सिंह, रानी लक्ष्मीबाई और टीपू सुल्तान अंकित हैं। आधुनिक आंदोलनों से महात्मा गांधी दांडी मार्च और नोआखली यात्रा तथा नेताजी सुभाष चंद्र बोस को प्रमुखता से दर्शाया गया है। इन चित्रों वाले पन्नों के ठीक बाद ही संविधान सभा के सभी सदस्यों जैसे डॉ. बी.आर. अंबेडकर, पंडित नेहरू, डॉ. राजेंद्र प्रसाद के असली हस्ताक्षर मौजूद हैं। इस मूल हस्तलिखित प्रति को सुरक्षित रखते हुए इसकी हूबहू प्रतियाँ बनाने की ज़िम्मेदारी देहरादून के हथिबड़कला में स्थित सर्वे ऑफ इंडिया को सौंपी गई थी। 26 जनवरी 1950 को देश का संविधान लागू होने से पहले सर्वे ऑफ इंडिया के फोटो-लिथोग्राफिक विभाग ने बहुत सावधानी से इसकी पहली पाँच आधिकारिक मास्टर प्रतियाँ तैयार कीं। मूल प्रति को फोटो-लिथो तकनीक के ज़रिए छपाई के रूप में बदला गया ताकि हर नई प्रति बिल्कुल असली दस्तावेज़ जैसी ही दिखे। उस दौर में इस काम को भारतीय कारीगरी और तकनीकी कौशल की एक बेमिसाल मिसाल माना गया। यही वे पहली पाँच प्रतियाँ थीं, जिनके ज़रिए दुनिया ने स्वतंत्र भारत के संविधान की पहली छपी हुई झलक देखी थी। इन पाँचों प्रतियों के तैयार होने के बाद इन्हें देश के सबसे महत्वपूर्ण संस्थानों में सुरक्षित रखा गया। इनमें से पहली दो प्रतियों को उत्तराखंड में ही रखने का फैसला किया गया। पहली प्रति देहरादून में भारतीय सैन्य अकादमी को दी गई और दूसरी प्रति मसूरी की लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी में सुरक्षित रखी गई। बाकी तीन प्रतियाँ देश की राजधानी दिल्ली भेजी गईं, जिनमें से एक राष्ट्रपति भवन, दूसरी लोकसभा सचिवालय और तीसरी राज्यसभा सचिवालय में सहेजकर रखी गई। समय बीतने के साथ इस ऐतिहासिक घटना से जुड़ी कुछ मशीनें हमेशा के लिए खो गईं। सालों बाद तकनीकी बदलाव के कारण जिन मशीनों से देश के इस पवित्र दस्तावेज़ की पहली प्रतियाँ छापी गई थीं, उन्हें पुराना घोषित कर दिया गया और कबाड़ में बेच दिया गया।

संविधान दिवस, जिसे ‘संविधान दिवस’ के नाम से भी जाना जाता है, हर साल 26 नवंबर को भारत के संविधान को अपनाने की याद में मनाया जाता है। 26 नवंबर, 1949 को भारत की संविधान सभा ने भारत के संविधान को अपनाया, जो 26 जनवरी, 1950 से लागू हुआ।

भारत के संविधान के बारे में कुछ रोचक तथ्य इस प्रकार हैं:-

भारत की जनता संविधान की परम संरक्षक है। संप्रभुता उन्हीं में निहित है और उन्हीं के नाम पर संविधान को अपनाया गया था।

संविधान के मसौदे पर हुई बहसों को देखने के लिए लगभग तीन वर्षों तक 53,000 से अधिक नागरिक संविधान सभा की दर्शक दीर्घा में बैठे।

यह विश्व का सबसे लंबा लिखित संविधान है, जिसमें इसके प्रारंभ के समय 395 अनुच्छेद, 22 भाग और 8 अनुसूचियां थीं।

भारत का संविधान टाइपसेट या मुद्रित नहीं किया गया था, बल्कि अंग्रेजी और हिंदी दोनों भाषाओं में हस्तलिखित और सुलेख में तैयार किया गया था। इसमें 90,000 शब्द थे।

इसे आचार्य नंदलाल बोस के मार्गदर्शन में शांतिनिकेतन के कलाकारों द्वारा पूर्णतया हस्तनिर्मित किया गया था, जबकि सुलेख का कार्य दिल्ली में प्रेम बिहारी नारायण रायज़ादा द्वारा किया गया था।

भारत के संविधान की मूल प्रतियां भारतीय संसद के पुस्तकालय में नाइट्रोजन से भरे विशेष पात्रों में रखी गई हैं।

संविधान का प्रत्येक भाग भारत के राष्ट्रीय इतिहास के एक चरण या दृश्य के चित्रण से प्रारंभ होता है। संविधान के प्रत्येक भाग के प्रारंभ में नंदलाल बोस ने भारत के राष्ट्रीय अनुभव और इतिहास के एक चरण या दृश्य का चित्रण किया है।

कलाकृतियां और चित्र (कुल 22), जो मुख्यतः लघुचित्र शैली में बनाए गए हैं, भारतीय उपमहाद्वीप के इतिहास के विभिन्न कालों के दृश्यों को दर्शाते हैं, जिनमें सिंधु घाटी में मोहनजो-दारो, वैदिक काल, गुप्त और मौर्य साम्राज्य, मुगल काल और राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन शामिल हैं।

संविधान सभा के 284 सदस्यों ने 24 जनवरी, 1950 को नई दिल्ली स्थित संसद के संविधान कक्ष में भारतीय संविधान पर हस्ताक्षर किए थे।

24 जनवरी, 1950 को संविधान सभा की अंतिम बैठक हुई। इसी बैठक में डॉ. राजेंद्र प्रसाद को भारत के पहले राष्ट्रपति के रूप में घोषित किया गया।

संविधान सभा में 15 महिला सदस्य थीं। इनमें सरोजिनी नायडू, राजकुमारी अमृत कौर, हंसबेन जीवराज मेहता, सुचेता कृपलानी और जी. दुर्गाबाई शामिल थीं, जिन्होंने सभी के लिए समान अधिकारों की बात की, जबकि दुनिया के कई हिस्सों में महिलाओं को बुनियादी अधिकारों से वंचित रखा जा रहा था।

भारत के राष्ट्रीय ध्वज को उसके वर्तमान स्वरूप में 22 जुलाई, 1947 को संविधान सभा की बैठक में अपनाया गया था, जो 15 अगस्त, 1947 को अंग्रेजों से भारत की स्वतंत्रता से कुछ दिन पहले हुई थी।

संविधान 26 जनवरी, 1950 को लागू हुआ। भारत के गणतंत्र बनने के बाद जी.वी. मावलंकर लोकसभा के पहले अध्यक्ष बने।

 

 

 

 

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

spot_img
spot_img

Stay Connected

22,024FansLike
0FollowersFollow
0SubscribersSubscribe

Latest Articles

- Advertisement -spot_img