एस.के.एम. न्यूज़ सर्विस
देहरादून, 03 जून। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और भारतीय वायु सेना (आईएएफ) ने हवाई प्लेटफॉर्म से रुद्रएम-II वायु-से-सतह मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण किया है। ये परीक्षण अत्यंत कठिन परिस्थितियों में किए गए, जिनमें सभी उप-प्रणालियों की क्षमता को सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण प्रक्षेप पथ का निर्धारण किया गया। मिसाइलों को छोड़े जाने के बाद सटीक रूप से पूर्वनिर्धारित लक्ष्य तक पहुंचाया गया। चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज (आईटीआर) द्वारा स्थापित विभिन्न रेंज उपकरणों से प्राप्त उड़ान आंकड़ों से पुष्टि होती है कि परीक्षण के सभी उद्देश्य पूर्णतः सिद्ध हुए। रुद्रएम-II को डीआरडीओ की नोडल प्रयोगशाला, अनुसंधान केंद्र इमारत, हैदराबाद द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित किया गया है। इस विकास में रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला, उच्च ऊर्जा सामग्री अनुसंधान प्रयोगशाला, आयुध अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान और आईटीआर जैसी अन्य सहयोगी प्रयोगशालाओं का सहयोग रहा है। विकास सह उत्पादन भागीदारों (डीसीपीपी) के साथ-साथ, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड, क्षेत्रीय सैन्य विमानन योग्यता केंद्र, मिसाइल प्रणाली गुणवत्ता आश्वासन एजेंसी और कई अन्य उद्योगों ने भी इस लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने सफल उड़ान परीक्षणों के लिए डीआरडीओ, भारतीय वायु सेना, रक्षा उपक्रमों, रक्षा उपक्रमों और उद्योग जगत के प्रयासों की सराहना की है। उन्होंने कहा कि इन परीक्षणों ने स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकियों की बढ़ती परिपक्वता को प्रदर्शित किया है, जो उन्नत हथियार प्रणालियों में आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष ने इस सराहनीय उपलब्धि के लिए परीक्षण से जुड़ी सभी टीमों को बधाई दी है।




