देहरादून। दिल्ली देहरादून एक्सप्रेस वे की जो हालत हो गई है महज चंद महीनों में उस पर उत्तराखंड कांग्रेस की प्रदेश प्रवक्ता डॉ प्रतिमा सिंह ने सरकार पर तीखा निशाना साधते हुए कहा कि उत्तराखंड में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। एक्सप्रेस-वे के निर्माण कार्यों में बड़े पैमाने पर हुए भ्रष्टाचार और तकनीकी लापरवाही के कारण पहाड़ों से टूटकर भारी मात्रा में मलबा नवनिर्मित रूट पर आ गया है। इस घटना को लेकर उत्तराखंड कांग्रेस ने सरकार को कटघरे में खड़ा किया है। राज्य और केंद्र सरकार पर हमला करते हुए उन्होंने बयान जारी कर कहा:”दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे का यह हाल साफ तौर पर ‘कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार’ का नतीजा है। पहली ही भारी बारिश ने सरकार के विकास के दावों की पोल खोल दी है। करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी अगर 12 किलोमीटर का नवनिर्मित एलिवेटेड कॉरिडोर मलबे से पट गया है, तो इसके लिए सीधे तौर पर सरकार की लापरवाही और ठेकेदारों की मिलीभगत जिम्मेदार है। जनता के पैसों की इस लूट को कांग्रेस बर्दाश्त नहीं करेगी। एलिवेटेड कॉरिडोर प्रभावित है डाटकाली मंदिर और आशारोड़ी के पास स्थित 12 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर के आसपास का हिस्सा मलबे की चपेट में आ गया है।यातायात बाधित होने की वजह से यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है एक्सप्रेस-वे के इस नवनिर्मित रूट पर भारी मलबा जमा होने से मार्ग पर यातायात पूरी तरह बाधित होने की आशंका गहरा गई है। प्रशासन अलर्ट पर है ऐसा महज काग़ज़ों में है घटना के बाद से स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें अलर्ट पर हैं, लेकिन बारिश के बीच मलबा हटाना बड़ी चुनौती बना हुआ है। इस मौसम में उत्तराखंड के पहाड़ी रास्तों और इस एक्सप्रेस-वे पर सफर करने वाले यात्रियों को बेहद सावधानी बरतने की सख्त हिदायत देकर सरकार ने अपना पल्ला झाड़ लिया है,भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण के गंभीर आरोप शुरू से ही लगते आ रहे हैं डॉ. प्रतिमा सिंह ने आरोप लगाया कि यह लैंडस्लाइड केवल एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि निर्माण में बरती गई भारी लापरवाही का नतीजा है:सुरक्षा मानकों की अनदेखी करना आज परेशानी का सबब बना हुआ है ऊंचे और संवेदनशील पहाड़ी हिस्सों व एलिवेटेड कॉरिडोर के पास पुख्ता सुरक्षा दीवारें (Retaining Walls) नहीं बनाई गईं। घटिया मैटेरियल का प्रयोग किया गया परियोजना पूरी होने से पहले ही पहाड़ों का इस तरह धंसना सीधे तौर पर घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल को दर्शाता है। उत्तराखंड कांग्रेस ने मांग की है कि इस पूरे मामले की किसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी या सिटिंग जज से उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। दोषी निर्माण कंपनियों को तुरंत ब्लैकलिस्ट किया जाए और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे को रोका जा सके। अन्यथा कांग्रेस सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन करेगी।




