एस.के.एम. न्यूज़ सर्विस
मेघालय। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मौजूदा वैश्विक व्यवस्था की अनिश्चितताओं के बीच मज़बूत तैयारी बनाए रखने के लिए तकनीकी फुर्ती, रणनीतिक दूरदर्शिता और संस्थागत इनोवेशन की ज़रूरत पर ज़ोर दिया है। शिलांग, मेघालय में ईस्टर्न एयर कमांड मुख्यालय में सैनिकों से बातचीत करते हुए, रक्षा मंत्री ने कहा कि हाइब्रिड खतरे, साइबर चुनौतियां, सूचना युद्ध, लॉजिस्टिक्स क्षमता, सप्लाई चेन सुरक्षा और ड्रोन युद्ध के लगातार बदलते स्वरूप में अहम तत्व बनकर उभर रहे हैं, और ऐसी स्थिति में रक्षा बलों के लिए केवल पारंपरिक तैयारी ही काफी नहीं है। राजनाथ सिंह ने अपनी शर्तों पर राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारत के ‘आत्मनिर्भर’ बनने की ज़रूरत पर फिर से ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की आत्मनिर्भरता की कोशिशों की वजह से ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ऐतिहासिक रूप से सफल रहा। उन्होंने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर के ज़रिए हमने आतंकवादियों और उनके आकाओं को दिखा दिया कि भारत अपनी सुरक्षा और संप्रभुता से कोई समझौता नहीं करेगा। हमारी रक्षा सेनाओं की क्षमता, सतर्कता और मज़बूत संकल्प ने एक बार फिर दुनिया के सामने भारत की बढ़ती ताकत को साबित किया है। ईस्टर्न एयर कमांड जैसे संगठन इस बड़े राष्ट्रीय विज़न में सक्रिय साझेदार बनकर उभरे हैं।” रक्षा मंत्री ने ईस्टर्न एयर कमांड को भारत की पूर्वी सीमा की सुरक्षा का एक अहम स्तंभ बताया और राष्ट्रीय सुरक्षा को मज़बूत करने में इसकी अहम भूमिका की तारीफ़ की। उन्होंने कहा, “चाहे युद्ध का मैदान हो, शांति के समय तैनाती हो, आपदा के समय मदद हो, ऊँचाई वाले इलाकों में ऑपरेशन हो या सीमा प्रबंधन – ईस्टर्न एयर कमांड ने हर स्थिति में लगातार पेशेवर रवैया, साहस और प्रतिबद्धता दिखाई है।” श्री राजनाथ सिंह ने मुश्किल और चुनौतीपूर्ण हालात में भी अपनी ड्यूटी को कुशलता से निभाने के लिए बहादुर सैनिकों की तारीफ़ की। उन्होंने कहा, “आपकी कुर्बानी, समर्पण और कर्तव्य के प्रति निष्ठा की वजह से ही नागरिक सुरक्षित जीवन जी पा रहे हैं। इसके अलावा, जब भी देश पर कोई प्राकृतिक आपदा या संकट आता है, तो आप मदद के लिए सबसे पहले आगे आते हैं। मानवता और देश की सेवा के प्रति यह समर्पण ही आपकी असली पहचान है। देश आपकी सेवा का हमेशा ऋणी रहेगा।” ईस्टर्न एयर कमांड के ऑपरेशन वाले इलाके की अहमियत बताते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि उत्तर-पूर्व सिर्फ़ भौगोलिक सीमाओं का हिस्सा नहीं है, बल्कि भारत की सुरक्षा, समृद्धि और रणनीतिक ताकत का एक अहम स्तंभ है। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ का एक मुख्य हिस्सा है। उन्होंने कहा, “आज, जब भारत वैश्विक मंच पर अपनी भूमिका मज़बूत कर रहा है, तो उत्तर-पूर्व की अहमियत और भी बढ़ गई है।” श्री राजनाथ सिंह ने रक्षा बलों को राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बताते हुए अपना संबोधन समाप्त किया। उन्होंने कहा कि सैनिक एक ऐसी संस्कृति का प्रतिनिधित्व करते हैं जिसमें अलग-अलग विचार फलते-फूलते हैं, अहम मूल्य बने रहते हैं और आपसी सम्मान स्वाभाविक रूप से पनपता है। उन्होंने कहा, “रक्षा बलों में महिलाओं की बढ़ती भूमिका केवल संस्थागत प्रगति से कहीं अधिक है। यह उन सांस्कृतिक मूल्यों का प्रमाण है जिनके लिए भारत दुनिया भर में जाना जाता है। यह दिखाता है कि आधुनिकता को अपनाते हुए भी हमारी संस्कृति अपने मूल सिद्धांतों पर मजबूती से टिकी हुई है।” इस मौके पर एयर चीफ मार्शल एपी सिंह (चीफ ऑफ द एयर स्टाफ), एयर मार्शल इंद्रपाल सिंह वालिया (एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, ईस्टर्न एयर कमांड) और भारतीय वायु सेना के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।




