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Friday, June 26, 2026


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राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय व सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा ने दिया इस्तीफा

अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय व ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। चंपत राय ट्रस्ट के महासचिव पद पर थे। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में दर्ज एफआईआर के बाद बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चम्पत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। बताया जा रहा है कि जांच की निष्पक्षता बनाए रखने और जांच पूरी होने तक यह कदम उठाया गया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास ने इस मामले में कहा कि उन्हें अब की स्थिति की कोई जानकारी नहीं है। गौरतलब है कि चढ़ावा गबन मामले में एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई है और जांच जारी है। बता दें कि बृहस्पतिवार से ही चंपत राय के इस्तीफे की चर्चा थी। वहीं, कल रात चढ़ावा चोरी के मामले में आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। चढ़ावा चोरी प्रकरण में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए नामजद आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। सभी आरोपियों का मेडिकल परीक्षण कराने के बाद उन्हें रिमांड मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करने की तैयारी है, जहां से न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजने की प्रक्रिया की जा रही है। मामले में दर्ज एफआईआर के बाद पुलिस जांच तेज कर दी गई है। अधिकारियों के अनुसार जांच में एसआईटी की प्राथमिक रिपोर्ट को भी शामिल किया जाएगा, ताकि सभी तथ्यों का समग्र परीक्षण हो सके। उधर, विपक्षी दल एफआईआर में किसी बड़े पदाधिकारी का नाम शामिल न किए जाने को लेकर सवाल उठा रहे हैं और जांच की निष्पक्षता पर आरोप लगा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे भी आवश्यक कार्रवाई की जाएगी और मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच जारी है।

इसके पहले, चढ़ावा चोरी के खुलासे के 19 दिन बाद और जांच के लिए गठित एसआईटी की सिफारिश के दो दिन बाद आखिरकार एफआईआर दर्ज की गई। एफआईआर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के ड्राइवर रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू, ट्रस्ट के पदाधिकारी अनिल मिश्रा के रिश्तेदार अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा के अलावा गणना कर्मी मनीष यादव, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय, रमाशंकर मिश्र व गणना इंचार्ज सुभाष श्रीवास्तव और कई अज्ञात के खिलाफ दर्ज कराई गई। सभी पर साजिश के तहत धोखाधड़ी कर चढ़ावा राशि चोरी करने का आरोप है। जिसके बाद आठों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया था। एसआईटी की जांच में करोड़ों रुपये की नकदी और जेवरातों का हेरफेर करने की पुष्टि हुई थी, जिसमें इन आरोपियों का नाम सामने आया। यही नहीं, ट्रस्ट ने भी घटना उजागर करने के बाद इन सभी को पकड़ा था। इनकी निशानदेही पर करीब तीन करोड़ रुपये बरामद किए थे। अब जब विवेचना होगी तो स्पष्ट हो सकेगा कि कितने करोड़ का खेल हुआ और कितना सोना-चांदी व कीमती धातु के जेवरात गायब किए गए। सीसीटीवी फुटेज की जांच में चोरी करते दिखे सभी लोगों को आरोपी बनाया गया है। पूछताछ व अन्य साक्ष्यों के आधार पर पता चला कि इस पूरी साजिश में टिन्नू यादव और सुभाष श्रीवास्तव की बड़ी भूमिका थी। सुभाष ने ही चोरी के खेल में अन्य लोगों को जोड़ा था। गणना में ड्यूटी लगाने को जांच पड़ताल का जिम्मा सुभाष के पास था लिहाजा इन दोनों को आरोपी बनाया गया। एसआईटी ने फुटेज को साक्ष्य के तौर पर जांच में शामिल किया था। अब पुलिस अपनी विवेचना में इन साक्ष्यों को शामिल करेगी। राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले के साथ ही अब जमीन खरीद-फरोख्त का मामला गरमा गया है। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने बृहस्पतिवार को एसआईटी को 11 दस्तावेज सौंपे। उन्होंने दावा किया कि इन जमीनों की खरीद-बिक्री में करोड़ों रुपये का घोटाला हुआ है।

सांसद ने आरोप लगाया कि मंदिर के लिए जमीनें बाजार मूल्य से कई गुना अधिक कीमत पर खरीदी गईं। इससे चंदे की रकम को भारी नुकसान पहुंचाया गया। संजय सिंह ने एसआईटी अध्यक्ष विजय विश्वास पंत और सदस्य नील रतन से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि चढ़ावे में अनियमितताओं से जुड़े लोगों की भूमिका जमीन सौदों में भी है। संजय सिंह ने गहन जांच और कार्रवाई की मांग की है।

एसआईटी ने अब इन दस्तावेज के आधार पर विस्तृत जांच शुरू कर दी है। एक सौदे में दो करोड़ रुपये की जमीन 18 मार्च 2021 को 18.5 करोड़ रुपये में ट्रस्ट को बेची गई। इस एक सौदे में करीब 16.5 करोड़ रुपये का अंतर बताया गया है। तत्कालीन मेयर ऋषिकेश उपाध्याय और ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा इस बैनामे के गवाह थे। दस्तावेज के अनुसार, मेयर ऋषिकेश उपाध्याय के भतीजे दीप नारायण ने फरवरी 2021 में 20 लाख रुपये में जमीन खरीदी। कुछ महीने बाद मई 2021 में उन्होंने वही जमीन ट्रस्ट को 2.5 करोड़ रुपये में बेच दी। सांसद का आरोप है कि इस सौदे में 2.30 करोड़ रुपये का लाभ हुआ। दान में मिली एक अन्य जमीन भी एक करोड़ रुपये में ट्रस्ट को बेची गई। संजय सिंह ने गाटा संख्या 247 की जमीन पर भी सवाल उठाए हैं। यह जमीन अप्रैल 2024 में 2.93 करोड़ रुपये के बजाय 23.61 करोड़ रुपये में खरीदी गई। आरोप है कि यह भूमि राजस्व अभिलेखों में नजूल (सरकारी) के रूप में चिह्नित थी। नवंबर 2023 में नौ करोड़ रुपये की जमीन 55.47 करोड़ रुपये में खरीदी गई। सांसद ने महंत रघुवर शरण और यशोदा नंदन त्रिपाठी से जुड़े सौदों की भी जांच मांगी है।

 

 

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