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Saturday, July 4, 2026


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बदल रही मसूरी की तस्वीर

एस.के.एम. न्यूज़ सर्विस

देहरादून। पर्यटन नगरी मसूरी में लगातार बढ़ रही पर्यटकों की संख्या और बढ़ते यातायात दबाव को कम करने के उद्देश्य से प्रस्तावित मसूरी मेट्रो रोपवे परियोजना को आगे बढ़ाने की दिशा में सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों के क्रम में सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने उत्तराखंड मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन, जिला प्रशासन, नगर पालिका मसूरी तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ प्रस्तावित रोपवे टर्मिनल स्टेशनों, और संबंधित भूमि का विस्तृत स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान परियोजना की तकनीकी व्यवहार्यता, पर्यावरणीय संतुलन और यातायात प्रबंधन से जुड़े विभिन्न पहलुओं की समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार की अगुवाई में अधिकारियों की टीम मसूरी के लाइब्रेरी चौक पर एकत्रित हुई। इस दौरान संबंधित अधिकारियों ने उन्हें प्रस्तावित रोपवे परियोजना की विस्तृत जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि प्रस्तावित रोपवे का मार्ग लाइब्रेरी चौक क्षेत्र से होकर गुजरेगा, जिसके मद्देनजर परियोजना से संबंधित आवश्यक भूमि और अन्य व्यवस्थाओं पर विचार-विमर्श किया गया। सचिव आवास ने मौके पर उपलब्ध भूमि की संभावनाओं का आकलन करते हुए आवश्यक निर्देश दिए। इस दौरान परियोजना के तकनीकी पहलुओं और भविष्य की आवश्यकताओं पर भी चर्चा हुई।

इसके बाद सचिव आवास डॉ आर राजेश कुमार के नेतृत्व में टीम ने पिक्चर पैलेस (चिक चॉकलेट) तथा गढ़वाल मंडल विकास निगम (मॉल रोड) के निकट प्रस्तावित रोपवे टर्मिनल स्टेशन के संभावित स्थानों का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने यात्रियों की आवाजाही, पहुंच मार्ग, सुरक्षा, तकनीकी व्यवहार्यता तथा यातायात प्रबंधन से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया।

निरीक्षण के अगले चरण में अधिकारियों ने आईएनआई डिस्पेंसरी एवं भनौत एस्टेट क्षेत्र की प्रस्तावित भूमि का निरीक्षण किया। इसके बाद नहाटा एस्टेट (लाल टिब्बा) में प्रस्तावित अपर रोपवे टर्मिनल स्टेशन के आसपास स्थित चार दुकानों वाले क्षेत्र का भी बारीकी से निरीक्षण किया गया। इस दौरान स्थल की भौगोलिक स्थिति, निर्माण की व्यवहार्यता तथा भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए चर्चा की गई।

सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने निरीक्षण के दौरान पाया कि चिक चॉकलेट/चार दुकान क्षेत्र में प्रस्तावित स्टेशन के लिए उपलब्ध स्थान सीमित है और वहां की भौगोलिक परिस्थितियां भी चुनौतीपूर्ण हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि स्टेशन के लिए अधिक सुरक्षित एवं उपयुक्त वैकल्पिक स्थान का चयन करते हुए भू-तकनीकी (जियो-टेक्निकल) अध्ययन के आधार पर नया प्रस्ताव तैयार किया जाए, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की तकनीकी अथवा सुरक्षा संबंधी समस्या उत्पन्न न हो।

निरीक्षण के दौरान इस बात पर विशेष बल दिया गया कि परियोजना को विकसित करते समय मसूरी की प्राकृतिक सुंदरता, पर्यावरणीय संतुलन और ऐतिहासिक पहचान से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि निर्माण कार्य के दौरान पर्यावरणीय मानकों का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाए और परियोजना को पर्यटन हितैषी स्वरूप में विकसित किया जाए।

मसूरी मेट्रो रोपवे परियोजना के क्रियान्वयन से पर्यटन सीजन में लगने वाले लंबे जाम से राहत मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही स्थानीय नागरिकों और पर्यटकों को सुरक्षित, तेज, सुविधाजनक और पर्यावरण अनुकूल परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी। परियोजना के पूरा होने से पर्यटन गतिविधियों को भी नई गति मिलने की संभावना है।

सचिव आवास डॉ आर राजेश कुमार की मौजूदगी में अधिकारियों ने परियोजना के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा करते हुए स्थल की भौगोलिक परिस्थितियों और निर्माण संबंधी संभावनाओं का भी आकलन किया। निरीक्षण दल में उत्तराखंड मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक ब्रिजेश कुमार मिश्रा, उप जिलाधिकारी मसूरी राहुल आनंद, संयुक्त महाप्रबंधक (सिविल) जय नंदन सिन्हा, नगर पालिका मसूरी के अधिशासी अधिकारी  गौरव भसीन, रेंज अधिकारी महेंद्र नेगी, प्रबंधक सिविल अभिषेक त्यागी, सेक्शन इंजीनियर सौरभ पटवाल, अशोक डोभाल, वरिष्ठ सर्वेयर कुंदन सिंह अधिकारी तथा वरिष्ठ सर्वेयर हरिओम सिंह सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।

सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार उत्तराखंड में आधुनिक, सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल परिवहन व्यवस्था विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। मसूरी मेट्रो रोपवे परियोजना पर्यटन नगरी में बढ़ते यातायात दबाव का दीर्घकालिक समाधान उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। हमारा प्रयास है कि परियोजना तकनीकी रूप से मजबूत, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल हो, ताकि स्थानीय लोगों और देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को बेहतर आवागमन की सुविधा मिल सके तथा मसूरी की प्राकृतिक और ऐतिहासिक पहचान भी अक्षुण्ण बनी रहे।

 

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