देहरादून 22 अप्रैल। शहर में कब्रिस्तानों में बाहरी मुस्लिम समुदाय के शवों को दफनाने से रोकने के मामले को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इस मुद्दे पर कांग्रेस सहित अन्य राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि कुछ असामाजिक तत्व जानबूझकर मुस्लिम समुदाय के भीतर विभाजन पैदा कर सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास कर रहे हैं।
वक्ताओं ने आशंका जताई कि वक्फ की भूमि पर कब्जा करने वाले लोग इस तरह के विवाद को बढ़ावा देकर अतिक्रमण को वैध ठहराने की कोशिश कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी धर्म में यह स्वीकार्य नहीं है कि मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार या दफन के लिए परिजनों को भटकना पड़े। इस तरह की घटनाएं मानवता के मूल्यों के खिलाफ हैं और समाज में आक्रोश का कारण बन रही हैं।
इस संबंध में प्रतिनिधिमंडल ने उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री खजान दास से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंपा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि सभी धर्मों में मृतक की आत्मा की शांति के लिए अंतिम संस्कार की व्यवस्था सुनिश्चित की जाती है और इसमें किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए।
मंत्री खजान दास ने मामले को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र उच्च स्तरीय बैठक बुलाने का आश्वासन दिया। साथ ही जिलाधिकारी देहरादून को पूरे प्रकरण की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रतिनिधिमंडल में हाजी याकूब सिद्दीकी, रजिया बेग, लताफत हुसैन, इमरान अहमद सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।