पिथौरागढ़। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में आदि कैलाश यात्रा के दौरान मध्य प्रदेश निवासी एक युवक की तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई। युवक को अचानक सांस लेने में परेशानी होने पर गुंजी स्थित अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उसने दम तोड़ दिया। मृतक की पहचान मध्य प्रदेश के इंदौर निवासी तिलक शर्मा (पुत्र मनोज शर्मा) के रूप में हुई है। इस घटना के बाद यात्रा पर उसके साथ आए दोस्तों में शोक की लहर है।
यात्रा के दौरान अचानक बिगड़ी तबीयत
जानकारी के अनुसार, तिलक शर्मा अपने दोस्तों के साथ आदि कैलाश की यात्रा पर आए थे। यात्रा के दौरान उच्च हिमालयी क्षेत्र में अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई और उन्हें सांस लेने में परेशानी होने लगी। साथियों ने तत्काल उन्हें गुंजी स्थित अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने उपचार के प्रयास किए, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।
धारचूला लाया गया शव, पोस्टमार्टम की कार्रवाई जारी
गुंजी अस्पताल में युवक की मौत के बाद उनका शव धारचूला लाया गया है। फिलहाल शव को राजकीय चिकित्सालय में रखा गया है। पुलिस की ओर से पंचायतनामा भरने और पोस्टमार्टम की कार्रवाई की जा रही है। आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया जाएगा।
धारचूला के एसडीएम आशीष जोशी ने बताया कि आदि कैलाश यात्रा के दौरान एक यात्री की मौत होने की सूचना मिली है। पुलिस द्वारा पंचनामा और पोस्टमार्टम की कार्रवाई की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा।
इस साल अब तक तीन श्रद्धालुओं की मौत
आदि कैलाश यात्रा के दौरान इस वर्ष अब तक तीन श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है। इससे पहले सुधीर नाम के एक श्रद्धालु की यात्रा से लौटते समय धारचूला पहुंचने पर तबीयत बिगड़ गई थी। कुछ ही देर बाद उनकी भी मौत हो गई थी।
उच्च हिमालयी क्षेत्रों में अधिक ऊंचाई और ऑक्सीजन की कमी के चलते यात्रियों को सांस लेने में परेशानी सहित कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में यात्रा के दौरान स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां बरतना और किसी भी तरह की परेशानी होने पर तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है। हालांकि, तिलक शर्मा की मौत का वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा।
कहां स्थित है आदि कैलाश?
आदि कैलाश उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले की धारचूला तहसील में भारत-तिब्बत सीमा के नजदीक स्थित है। इसे छोटा कैलाश, शिव कैलाश और बाबा कैलाश के नाम से भी जाना जाता है। समुद्र तल से लगभग 5,945 मीटर की ऊंचाई पर स्थित आदि कैलाश को धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसे तिब्बत स्थित कैलाश पर्वत की प्रतिकृति भी कहा जाता है। यहां यात्रा के लिए श्रद्धालुओं को इनर लाइन परमिट लेना अनिवार्य होता है।




