मुजफ्फरपुर। बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित ब्रह्मपुरा इलाके के प्रसिद्ध प्रसाद हॉस्पिटल के आईसीयू वार्ड में देर रात अचानक भीषण आग लग गई। इस दर्दनाक घटना में 20 से अधिक मरीज गंभीर रूप से झुलस गए, जबकि कई मरीजों की मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल व्याप्त हो गया। घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की आठ गाड़ियां मौके पर पहुंच गईं। दमकल कर्मियों ने कड़ी मेहनत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पा लिया। आग पर काबू पाने में काफी समय लगा, जिस दौरान पूरे परिसर में तनावपूर्ण माहौल रहा। अग्निशमन पदाधिकारी आरएन पांडेय ने बताया ”सुबह करीब तीन बजे आग लगने की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही टीम मौके पर पहुंची। उस समय आईसीयू में काफी धुआं भरा हुआ था. अब तक 20 से अधिक मरीजों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है। तीन लोगों की मौत की सूचना मिली है, जिसकी जांच की जा रही है।” जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर बचाव कार्यों का निरीक्षण किया। सभी घायल मरीजों को तुरंत एम्बुलेंस के माध्यम से मुजफ्फरपुर के विभिन्न अस्पतालों में स्थानांतरित कर दिया गया, जहां उनका इलाज जारी है। प्रशासन की टीम मृतकों की पहचान की प्रक्रिया में जुटी हुई है। साथ ही, अस्पताल प्रबंधन और पुलिस मिलकर आईसीयू वार्ड में हुए संपत्ति नुकसान का आकलन कर रही है। मृतकों की संख्या पर आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है। डीएम सुब्रत कुमार सेन ने बताया कि अभी तक 3 मौत की पुष्टि हुई है। आईसीयू में 13 से 15 मरीज भर्ती थे। अस्पातल प्रशासन का कहना है कि कुछ मरीजों को दूसरे अस्पताल में शिफ्ट किया गया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आग लगने का मुख्य कारण बिजली का शॉर्ट सर्किट हो सकता है। हालांकि, इसकी पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। जिला प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च स्तरीय जांच समिति गठित कर दी है, जो पूरे हादसे की विस्तृत जांच करेगी। घटना के बाद राहत कार्य तेजी से चल रहे हैं। प्रभावित परिवारों में शोक की लहर है। स्थानीय प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि सभी पीड़ितों को उचित मुआवजा और सहायता प्रदान की जाएगी। इस हादसे ने अस्पताल सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। चश्मदीदों के अनुसार, आग की लपटें और धुंआ उठते ही अस्पताल में चीख-पुकार मच गई। अस्पताल कर्मचारियों और आसपास के स्थानीय निवासियों ने तुरंत खिड़कियां तोड़कर घायल मरीजों को बाहर निकाला। उनकी इस मुस्तैदी से कई जिंदगियां बचाई जा सकी है।




