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Saturday, July 11, 2026


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जांच में सही पाए गए आरोप, शासन ने दिए कार्रवाई के निर्देश

देहरादून। उत्तराखंड स्थित केदारनाथ धाम में वीआईपी मेहमानों के आवास और भोजन पर मंदिर समिति की ओर से खर्च किए जाने के आरोपों की जांच में वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि हुई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर उत्तराखंड शासन ने भी मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं। बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) से जुड़े वीआईपी अतिथि विवाद में बड़ा खुलासा हुआ है। मंदिर समिति द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट में केदारनाथ धाम में विशिष्ट अतिथियों के आवास और भोजन आदि से संबंधित बिलों के भुगतान में अनियमितताओं की पुष्टि हुई है। बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने इस बारे में जानकारी दी की जांच पूरी हो चुकी है और मंदिर समिति द्वारा अपनी आख्या (रिपोर्ट) शासन को भेजी का चुकी है। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद उत्तराखंड शासन ने भी मामले का संज्ञान लेते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

मामला उस समय चर्चा में आया, जब आरटीआई के माध्यम से कुछ दस्तावेज सार्वजनिक हुए। इन दस्तावेजों में आरोप लगाया गया था कि केदारनाथ धाम की यात्रा पर पहुंचे कुछ वीआईपी व्यक्तियों के भोजन और आवास से जुड़े खर्च मंदिर समिति के खाते से वहन किए गए। दस्तावेजों में भाजपा प्रदेश सचिव नेहा जोशी के नाम पर लगभग 60 हजार रुपए और केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल के नाम पर करीब 37 हजार रुपए से अधिक के खर्च का उल्लेख किया गया था। दस्तावेज सार्वजनिक होने के बाद विपक्ष ने इसे श्रद्धालुओं के चढ़ावे और दान राशि के दुरुपयोग का मामला बताते हुए सरकार और मंदिर समिति पर सवाल उठाए थे। वहीं, जिन नेताओं के नाम सामने आए, उन्होंने स्वयं पर लगे आरोपों से इनकार करते हुए कहा था कि उन्होंने अपने निजी खर्च का भुगतान स्वयं किया था। विवाद बढ़ने के बाद बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के निर्देश पर चार सदस्यीय जांच समिति गठित की गई थी। समिति को पूरे प्रकरण से जुड़े अभिलेखों, बिलों और भुगतान संबंधी दस्तावेजों की जांच का जिम्मा सौंपा गया था। जांच के दौरान समिति ने विभिन्न वित्तीय अभिलेखों और भुगतान प्रक्रियाओं का परीक्षण किया। जांच रिपोर्ट में पाया गया कि कुछ मामलों में विशिष्ट अतिथियों से संबंधित आवास और भोजन के बिल मंदिर समिति के माध्यम से भुगतान किए गए थे। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि भुगतान प्रक्रिया में निर्धारित वित्तीय नियमों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। जांच रिपोर्ट के आधार पर उत्तराखंड शासन के पर्यटन एवं धर्मस्व विभाग ने भी मामले को गंभीर माना है। 25 जून 2026 को उत्तराखंड शासन उप सचिव अनिल कुमार पांडे द्वारा बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी को भेजे गए पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि, ‘जांच रिपोर्ट में प्रथम दृष्टया मंदिर कोष से आहरित अग्रिम धनराशि को बिना सक्षम स्तर की स्वीकृति के जारी करना वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में पाया गया है। पत्र में तत्कालीन व्यवस्थापक केदारनाथ, तत्कालीन मुख्य प्रभारी अधिकारी केदारनाथ और तत्कालीन मुख्य कार्याधिकारी, बदरी-केदार मंदिर समिति की भूमिका को भी संदिग्ध बताया गया है। शासन ने अपने पत्र में बीकेटीसी अधिनियम 1939 और उसके अंतर्गत लागू नियमावलियों के प्रावधानों के अनुसार संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं’।

शासन के इस पत्र ने स्पष्ट कर दिया है कि मामला केवल आरोपों तक सीमित नहीं है, बल्कि जांच के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी अनियमितताओं को स्वीकार किया गया है। केदारनाथ और बदरीनाथ जैसे प्रमुख धामों में आने वाले श्रद्धालु बड़ी संख्या में मंदिरों में दान और चढ़ावा अर्पित करते हैं। ऐसे में यदि मंदिर कोष की राशि का उपयोग किसी भी प्रकार के वीआईपी अतिथि या गैर-अनुमोदित खर्चों में किया जाता है तो यह सीधे तौर पर श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा विषय बन जाता है। यही कारण है कि मामला सामने आने के बाद धार्मिक संगठनों और आम श्रद्धालुओं के बीच भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

जांच रिपोर्ट और शासन के निर्देश सामने आने के बाद अब जिम्मेदारी तय करने की मांग तेज हो गई है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने पूरे मामले में पारदर्शी कार्रवाई और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़े कदम उठाने की मांग की है।

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