नई दिल्ली। भारतीय निशानेबाजी जगत के लिए एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। देश के महान निशानेबाज और प्रतिष्ठित कोच जसपाल राणा का 49 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन से खेल जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। खिलाड़ियों, खेल प्रशासकों और प्रशंसकों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए भारतीय निशानेबाजी में उनके अतुलनीय योगदान को याद किया।
मूल रूप से उत्तराखंड के निवासी जसपाल राणा महज 18 साल की उम्र में 1994 में मिलान में आयोजित विश्व शूटिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता और एक जूनियर विश्व रिकॉर्ड बनाया, जबकि वह पैर में लगी एक असहनीय चोट से जूझ रही थे। जसपाल राणा भारत के सबसे सफल निशानेबाजों में गिने जाते थे। उन्होंने मुख्य रूप से 25 मीटर सेंटर फायर पिस्टल स्पर्धा में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्होंने देश का गौरव बढ़ाते हुए राष्ट्रमंडल खेलों में कुल 15 पदक अपने नाम किए। इसके अलावा एशियन गेम्स में भी उन्होंने कई पदक जीतकर भारतीय निशानेबाजी को नई पहचान दिलाई। उनकी उपलब्धियों ने देश के अनेक युवा खिलाड़ियों को इस खेल की ओर आकर्षित किया।
एक सफल खिलाड़ी के बाद जसपाल राणा ने कोच की भूमिका में भी शानदार योगदान दिया। उन्हें 2012 में जूनियर राष्ट्रीय पिस्टल कोच और बाद में 2025 में हाई-परफॉर्मेंस कोच के रूप में नियुक्त किया गया था। उन्हें मनु भाकर के कौशल को निखारने का श्रेय दिया जाता है, जिसका परिणाम पेरिस ओलंपिक में उनकी ऐतिहासिक दोहरी कांस्य पदक जीत के रूप में सामने आया।उन्होंने भारतीय निशानेबाजी टीम के कई खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दिया और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन के कोचिंग के साथ मार्गदर्शन भी किया। मनु भाकर की सफलता में जसपाल राणा की कोचिंग और अनुभव की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है।
- अर्जुन पुरस्कार: 1994
- पद्म श्री: 1997
- द्रोणाचार्य पुरस्कार: 2020 (कोचिंग में उत्कृष्टता के लिए)
देश के महान निशानेबाज और प्रतिष्ठित कोच जसपाल राणा का जाना भारतीय खेल जगत तथा उत्तराखंड के लिए एक अपूरणीय क्षति है। एक उत्कृष्ट निशानेबाज, प्रेरणादायी गुरु और समर्पित खेल व्यक्तित्व के रूप में उन्हें हमेशा याद किया जाएगा। उनकी उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेंगी। भारतीय खेल इतिहास में उनका नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज रहेगा।




