देहरादून 20 मार्च। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने शुक्रवार को लोक भवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में उत्तराखण्ड सरकार के मंत्रिपरिषद के नवनियुक्त मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी उपस्थित रहे। राज्यपाल ने विधायक खजान दास, मदन कौशिक, भरत सिंह चौधरी, प्रदीप बत्रा एवं राम सिंह कैड़ा को मंत्री पद की शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण समारोह में महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल एवं उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी, कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, श्रीमती रेखा आर्या, गणेश जोशी एवं सौरभ बहुगुणा, सांसद महेन्द्र भट्ट और नरेश बंसल सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन द्वारा किया गया।
लंबे समय से धामी सरकार में कैबिनेट विस्तार पर चर्चा चल रही थीं। सरकार के चार साल के कार्यकाल के बाद चर्चाओं पर विराम लगा है। धामी कैबिनेट में अब कांग्रेसी पृष्ठभूमि वाले मंत्रियों का बहुमत हो गया है। सीएम समेत कुल 12 मंत्रियों में से सात मंत्री अब ऐसे हैं, जो पूर्व में कांग्रेस में रहे और कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आ गए थे। धामी सरकार में अब बड़ी संख्या उन नेताओं की हो गई है, जिनकी राजनीतिक जड़ें कभी कांग्रेस में रही हैं। कैबिनेट में जिन पांच विधायकों को जगह दी गई है, उनमें से केवल मदन कौशिक, खजान दास तो पूरी तरह से भाजपा पृष्ठभूमि के हैं। बाकी भरत सिंह चौधरी, राम सिंह कैड़ा, प्रदीप बत्रा कांग्रेसी बैकग्राउंड के रहे हैं। ये बात अलग है कि ये सभी काफी समय से कांग्रेस छोड़कर भाजपा के साथ जुड़े हुए हैं। कैबिनेट के पुराने मंत्रियों को देखें तो सतपाल महाराज, सुबोध उनियाल, सौरभ बहुगुणा, रेखा आर्य भी कांग्रेस बैंकग्राउंड के रहे हैं। जबकि गणेश जोशी और धन सिंह रावत की पूरी तरह से भाजपा से जुड़े रहे हैं। कांग्रेस वालों में से ज्यादातर मंत्री ऐसे हैं जो कि पूर्व में कांग्रेस से ही विधायक या मंत्री रह चुके हैं।
चुनावी पिच पर हैट्रिक लगाने के लिए मुख्यमंत्री धामी ने अपनी टीम इलेवन उतार दी है। टीम में नए और पुराने चेहरों को शामिल कर 2027 में बेहतर प्रदर्शन करने का भरोसा जताया है। चुनावी वर्ष में पांच नए कैबिनेट मंत्री बनाकर टीम पूरी की है। टीम में धामी की भूमिका कैप्टन के रूप में है। पुराने चेहरों में विधायक खजान दास व मदन कौशिक को टीम में जगह दी है। दोनों विधायक पूर्व भाजपा सरकारों में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। जबकि रुद्रप्रयाग विधानसभा क्षेत्र से विधायक भरत चौधरी, भीमताल से राम सिंह कैड़ा व रुड़की से प्रदीप बत्रा को पहली बार कैबिनेट में शामिल कर मंत्री की कुर्सी मिली है।सरकार व संगठन ने आगामी चुनाव को देखते हुए कैबिनेट विस्तार में क्षेत्रीय व जातीय संतुलन बनाया है। पहली बार हरिद्वार जिले से दो मंत्री बनाए गए। त्रिवेंद्र सरकार में मदन कौशिक के पास संसदीय कार्य व शहरी विकास मंत्री के रूप में बड़ी जिम्मेदारी थी। उनके हटने के बाद कैबिनेट में हरिद्वार का प्रतिनिधित्व समाप्त हो गया था। वहीं, नौ साल के बाद रुद्रप्रयाग जिले को फिर से कैबिनेट मंत्री मिला है। उत्तराखंड के राजनीतिक इतिहास में मिथक रहा है कि प्रदेश में सरकार चाहे भाजपा या कांग्रेस की रही है। रुद्रप्रयाग विधानसभा से मंत्री बना है। त्रिवेंद्र सरकार में रुद्रप्रयाग जिले को कैबिनेट में जगह नहीं मिली थी। सीएम धामी ने अपनी टीम में रुद्रप्रयाग को स्थान दिया है। मुख्यमंत्री धामी ने टीम इलेवन में संतुलन बना कर चुनावी पिच पर हैट्रिक लगाने की पटकथा लिखी है। पांच नए मंत्रियों के लिए भी इस मुकाबले में परफॉर्मेंस दिखाने की बड़ी चुनौती है। मदन कौशिक और प्रदीप बत्रा के कंधों पर अब हरिद्वार जिले में कमल खिलाने की बड़ी जिम्मेदारी है। यहां 11 में से केवल तीन सीटें ही भाजपा के पास हैं। जबकि 2017 के चुनाव में यहां की 11 में से आठ सीटें भाजपा के पास थीं। उधर, पार्टी ने भीमताल से राम सिंह कैड़ा को कैबिनेट में लाकर कहीं न कहीं युवाओं तक पकड़ मजबूत करने की कोशिश की है। देहरादून जिले में वैसे तो भाजपा के पास 10 में से 9 सीटें हैं, लेकिन खजानदास के शामिल होने से कहीं न कहीं पार्टी दलित वोटबैंक को और मजबूत करने की कोशिश में है। पार्टी उन्हें इसी रूप में आगे भी इस्तेमाल करने की तैयारी में है। गढ़वाल में देखें तो पौड़ी और टिहरी के बाद अब रुद्रप्रयाग जिले को कैबिनेट में स्थान मिला है। मकसद ये है कि रुद्रप्रयाग और आसपास के जिलों में भाजपा की साख कायम रहे।




