17.7 C
Dehradun
Saturday, February 21, 2026


spot_img

रेशम उत्पादन से बढ़ेगी किसानों की आय, उत्तराखण्ड बनेगा आत्मनिर्भर: कृषि मंत्री

देहरादून। सूबे के कृषि मंत्री गणेश जोशी ने आज सहसपुर में क्षेत्रीय रेशम उत्पादन अनुसंधान केन्द्र केन्द्रीय रेशम बोर्ड, वस्त्र मंत्रालय भारत-सरकार सहसपुर-देहरादून के तत्वाधान में आयोजित रेशम कृषि मेले का शुभारंभ किया। इस अवसर पर कृषि मंत्री गणेश जोशी ने रेशम विभाग द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। कृषि मंत्री जोशी ने रेशम के क्षेत्र उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्रगतिशील किसानों को सम्मानित भी किया। इस दौरान उन्होंने क्षेत्रीय रेशम उत्पादन अनुसंधान केंद्र सहसपुर-देहरादून द्वारा प्रकाशित पुस्तक का विमोचन तथा रेशम संग्रहालय का और कृषि आधारित शहतूत वृक्षा रोपण का एकीकृत मॉडल का भी उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने परिसर में पौधा रोपण भी किया और रेशम कृषकों द्वारा अपने अनुभव भी साझा किए।
इस अवसर पर कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य बहुमूल्य प्रजाति के बाईवोल्टीन रेशम कोया उत्पादन के लिए देशभर में प्रसिद्ध है, जिसकी गुणवत्ता अंतरराष्ट्रीय स्तर की है। उन्होंने बताया कि राज्य के मैदानी एवं तराई क्षेत्र बाईवोल्टीन प्रजाति के कोया उत्पादन के लिए अत्यंत अनुकूल हैं। मंत्री जोशी ने कहा कि पर्वतीय एवं सुदूरवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों में, जहां भारी उद्योग स्थापित करना संभव नहीं है, वहां उपलब्ध श्रमशक्ति का उपयोग करते हुए किसानों को वन्या रेशम जैसे ओक टसर, मूगा एवं एरी रेशम उत्पादन से जोड़ा जा रहा है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।
कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि वर्ष 2025-26 में राज्य कैबिनेट द्वारा रेशम कोयों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पारित किया गया है, जिससे किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य प्राप्त होगा। साथ ही विभागीय औद्यानिक कार्यों में लगे दैनिक श्रमिकों की मजदूरी ₹195 प्रतिदिन से बढ़ाकर ₹480 प्रतिदिन की गई है, जिससे श्रमिकों को आर्थिक रूप से अधिक लाभ मिल रहा है। कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि शीघ्र ही गढ़वाल और कुमाऊं में एक एक सिल्क पार्क विकसित किए जाएंगे।
उन्होंने बताया कि रेशम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार तथा केन्द्रीय रेशम बोर्ड, भारत सरकार के माध्यम से संचालित केंद्रपोषित योजनाओं के अंतर्गत रेशम कीटपालकों को वृक्षारोपण, कीटपालन भवन निर्माण एवं उपकरणों की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। साथ ही प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों की दक्षता और क्षमता में वृद्धि की जा रही है, जिससे कोया एवं वस्त्र उत्पादन बढ़ेगा और किसानों की आय में वृद्धि सुनिश्चित होगी। कृषि मंत्री जोशी ने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने के उद्देश्य से राज्य एवं केंद्र सरकार विभिन्न योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन कर रही हैं। इसी क्रम में रेशम विभाग द्वारा “रेशम ककून क्राफ्ट” जैसी नवाचारी योजना शुरू की गई है, जिसके अंतर्गत महिला रेशम कृषक रेशम कोयों से आकर्षक उत्पाद तैयार कर रही हैं। इन उत्पादों की बाजार में अच्छी मांग है, जिससे महिलाओं की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है और वे आत्मनिर्भर बन रही हैं।
उन्होंने कहा कि पहले राज्य रेशम कीट बीज आपूर्ति के लिए बाहरी स्रोतों पर निर्भर था, लेकिन अब राज्य में ही उच्च गुणवत्ता वाले रेशम कीट बीजों का उत्पादन किया जा रहा है। इससे उत्तराखण्ड न केवल आत्मनिर्भर बना है, बल्कि भविष्य में अन्य राज्यों को भी रेशम कीट बीज उपलब्ध कराने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि इस कार्य से जुड़ी 12 से अधिक महिलाएं प्रतिवर्ष एक लाख रुपये से अधिक आय अर्जित कर ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं। कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि रेशम उद्योग के सर्वांगीण विकास के लिए किसानों, विभाग और सरकार की संयुक्त जिम्मेदारी है, जिसे पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ निभाया जाएगा, ताकि राज्य में रेशम उद्योग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सके।
इस अवसर पर स्थानीय विधायक सहदेव सिंह पुंडीर, निदेशक रेशम प्रदीप कुमार, पूर्व निदेशक डॉ.सरदार सिंह, प्रभारी छेत्रपाल सिंह, डॉ.हर्ष कुमार, डॉ.गुलज़ार अहमद खान सहित बड़ी संख्या में रेशम कृषक उपस्थित थे।

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

spot_img
spot_img

Stay Connected

22,024FansLike
0FollowersFollow
0SubscribersSubscribe

Latest Articles

- Advertisement -spot_img
error: Content is protected !!