बागेश्वर। जनपद में औषधीय पौधों, विशेषकर कुटकी के उत्पादन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से जिलाधिकारी आकांक्षा कोंडे की अध्यक्षता में औषधीय प्लांटेशन की कार्ययोजना को लेकर समीक्षा बैठक आयोजित की गई। जिलाधिकारी ने भेषज विभाग सहित सभी संबंधित विभागों को फरवरी माह के अंत तक विस्तृत एवं क्रियान्वयन योग्य कार्ययोजना तैयार कर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
बैठक में जिलाधिकारी ने भेषज समन्वयक को प्लांटेशन क्षेत्रों की बिफोर एवं आफ्टर फोटोग्राफी तथा ड्रोन वीडियो तैयार कराने के निर्देश दिए, ताकि कार्य की पारदर्शिता एवं प्रगति का समुचित आकलन किया जा सके। उन्होंने कहा कि औषधीय पादप उत्पादन को सुदृढ़ एवं व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाने के लिए कम से कम 15 मास्टर ट्रेनर तैयार किए जाएं तथा प्रशिक्षण हेतु रोस्टर बनाकर चरणबद्ध कार्यक्रम संचालित किया जाए।
जिलाधिकारी ने भेषज विभाग, कृषि विभाग, सिंचाई विभाग एवं खंड विकास अधिकारियों को समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए। कृषि अधिकारी को वर्मी कम्पोस्ट पिट हेतु विस्तृत सर्वेक्षण कर क्लस्टर आधारित कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया। साथ ही अधिकारियों को क्षेत्र भ्रमण कर काश्तकारों से सीधे संवाद स्थापित करने, खाद, सिंचाई, कीटनाशक, प्रशिक्षण एवं अन्य आवश्यकताओं की जानकारी प्राप्त कर समयबद्ध कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
सिंचाई व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण हेतु सिंचाई एवं लघु सिंचाई विभाग को संयुक्त सर्वेक्षण कर आवश्यक कार्यवाही करने को कहा गया।
भेषज समन्वयक ताहिर हुसैन ने अवगत कराया कि कर्मी, सोराग, बदियाकोट, डौला, बोरबलड़ा एवं कीमू ग्राम पंचायतों में लगभग 500 नाली क्षेत्र में औषधीय पौध उत्पादन हेतु शासन को प्रस्ताव प्रेषित किया गया है।




