देहरादून 9 अप्रैल, सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन रुक्मणी विवाह का भव्य एवं भावपूर्ण प्रसंग श्रद्धा और उल्लास के साथ प्रस्तुत किया गया। श्रीमद् भागवत सेवा जन कल्याण समिति द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में दूर-दूर से पहुंचे श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी, जिससे सुभाष नगर सेठ पन्नालाल ग्राउंड में आयोजित पूरा कथा स्थल भक्ति और उत्सव के रंग में रंग गया।
कथा के दौरान व्यास आचार्य पवनंदन जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मणी के दिव्य मिलन का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि विदर्भ की राजकुमारी रुक्मणी ने श्रीकृष्ण को अपना आराध्य मानते हुए विपरीत परिस्थितियों में भी अटूट श्रद्धा और विश्वास बनाए रखा। जब उनका विवाह शिशुपाल से तय किया गया, तब उन्होंने श्रीकृष्ण को पत्र लिखकर सहायता की गुहार लगाई।
महाराज ने विस्तार से वर्णन किया कि कैसे भगवान श्रीकृष्ण ने रुक्मणी जी के प्रेम और समर्पण को स्वीकार करते हुए उनका हरण किया और द्वारका ले जाकर वैदिक रीति-रिवाजों से विवाह संपन्न किया। इस दिव्य प्रसंग के वर्णन के दौरान श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे और पूरा पंडाल “राधे-कृष्ण” और “जय श्रीकृष्ण” के जयघोष से गूंज उठा।
विवाह प्रसंग को जीवंत बनाने के लिए भजन-कीर्तन का विशेष आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने फूलों की वर्षा करते हुए नृत्य किया और भक्ति में सराबोर नजर आए। महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों ने एक साथ भक्ति रस का आनंद लिया, जिससे वातावरण पूर्णतः आध्यात्मिक बन गया।
अपने प्रवचनों में महाराज ने रुक्मणी विवाह को आत्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक बताते हुए कहा कि सच्ची श्रद्धा और विश्वास से भगवान की कृपा अवश्य प्राप्त होती है। उन्होंने समाज में बढ़ती भौतिकता के बीच भक्ति के मार्ग को अपनाने का संदेश दिया।
इस अवसर पर माननीय विधायक विनोद चमोली, प्रदेश अध्यक्ष भाजयुमो विपुल मैंडोली, उपाध्यक्ष अभिषेक परमार, महासचिव नवीन जोशी, कोषाध्यक्ष केएन लोहनी, सुमित मेहता, बृज किशोर यादव, मीडिया प्रभारी गणेश, मालती राई, रेखा लोहनी, कादंबरी शर्मा, तारा राई, ममता राई, रेखा यादव, दीपक गोसाईं एवं प्रदीप राई सहित क्षेत्र के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण कर अंत में प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन ने क्षेत्र में आध्यात्मिक जागरूकता और सामाजिक समरसता का संदेश प्रसारित किया।




