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Tuesday, February 10, 2026


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महिलाओं की सुरक्षा पर धामी सरकार पूरी तरह विफल : गरिमा

देहरादून। आज प्रकाशित दो अलग-अलग खबरें उत्तराखंड, विशेषकर देहरादून जैसे संवेदनशील और प्रशासनिक दृष्टि से अति-महत्वपूर्ण शहर में बदहाल कानून व्यवस्था की भयावह तस्वीर पेश कर रही हैं। राजधानी देहरादून, जहां मुख्यमंत्री, राज्यपाल, वरिष्ठ अधिकारी और पुलिस के आला अफसरों के कार्यालय एवं आवास स्थित हैं, वहीं अपराधी निडर होकर स्कूल के बाहर छात्राओं के अपहरण के प्रयास कर रहे हैं और दिनदहाड़े कार्यरत महिलाओं की हत्या जैसी जघन्य घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। पिछले मात्र पांच दिनों में देहरादून में तीन कार्यरत युवतियों की सरेआम हत्या इस बात का प्रमाण है कि धामी सरकार ki “धाकड़ कानून व्यवस्था” अपराधियों के सामने पूरी तरह ढह चुकी है। अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्हें न पुलिस का डर है, न कानून का और न ही शासन-प्रशासन का। आज स्कूल के बाहर छात्रा के अपहरण के प्रयास की घटना ने यह साफ कर दिया है कि प्रदेश की बेटियां अब शैक्षणिक परिसरों के बाहर भी सुरक्षित नहीं हैं। सवाल यह है कि जब राजधानी में यह हाल है तो प्रदेश के दूरस्थ इलाकों की स्थिति क्या होगी? गरिमा ने यह भी कहा कि आज धामी राज में चौथा स्तंभ भी खतरे में है जिस तरह से वरिष्ठ पत्रकार हेम भट्ट के ऊपर हमला हुआ वह भी अपने आप में सरकार की कलई खोलता है और भाजपा द्वारा समाज में बोये जा रहे नफरत के बीज का परिणाम बताया। उत्तराखंड कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा दसौनी ने कहा कि धामी सरकार महिला सुरक्षा के नाम पर केवल खोखले दावे और विज्ञापन कर रही है, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि महिलाएं, छात्राएं और कामकाजी युवतियां खुद को असुरक्षित महसूस कर रही हैं। महिला अपराधों पर सरकार की चुप्पी और निष्क्रियता अपराधियों को खुली छूट देने के समान है।
कांग्रेस मांग करती है कि राजधानी देहरादून सहित पूरे प्रदेश में महिला अपराधों की उच्चस्तरीय, समयबद्ध जांच कराई जाए। स्कूलों, कॉलेजों और कार्यस्थलों के आसपास तत्काल प्रभाव से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए। महिला अपराधों में लिप्त अपराधियों पर फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से सख्त और त्वरित सजा सुनिश्चित की जाए। प्रदेश की जनता जानना चाहती है कि क्या धामी सरकार का “डबल इंजन” केवल अपराधियों को संरक्षण देने के लिए चल रहा है? उत्तराखंड कांग्रेस स्पष्ट करती है कि महिलाओं की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और सरकार की नाकामी के खिलाफ सड़क से सदन तक संघर्ष जारी रहेगा।

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