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Monday, March 30, 2026


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गौरव और सेवा की अनुपम विरासत छोड़ गए ब्रिगेडियर पी.एस. गुरूंग

  • ब्रिगेडियर ब्रिगेडियर पी.एस. गुरूंग का 81 वर्ष की आयु में निधन
  • आज सैन्य सम्मान के साथ टपकेश्वर मोक्षधाम में दी गई अंतिम विदाई 
  • गणमान्य व्यक्तियों ने ब्रिगेडियर गुरूंग को समाज के लिए अपूर्णीय क्षति बताया 

देहरादून, 30 मार्च। विशिष्ट सेवा मेडल से अलंकृत वरिष्ठ समाजसेवी ब्रिगेडियर पी.एस. गुरूंग का 28 मार्च की देर रात मैक्स अस्पताल में निधन हो गया। 81 वर्ष की आयु में उनका यूं अचानक जाना न केवल गोर्खाली समुदाय, बल्कि समूचे समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति बन गया है। उनके निधन से क्षेत्र में शोक की गहरी छाया छा गई है।

ब्रिगेडियर गुरूंग वीरता और त्याग की उस परंपरा के प्रतीक थे, जिसे उन्होंने अपने जीवन में पूरी निष्ठा से जिया। वे शहीद लेफ्टिनेंट गौतम गुरूंग (सेना मेडल) के पिता थे—एक ऐसे वीर सपूत, जिसने मातृभूमि की रक्षा में अपने प्राण न्योछावर कर दिए। पिता और पुत्र, दोनों ने 3/4 गोरखा रेजिमेंट में रहकर देश की सेवा की और वीरता की अमिट मिसाल कायम की।

इकलौते पुत्र की शहादत के पश्चात भी ब्रिगेडियर गुरूंग ने अपने दुख को समाज सेवा की शक्ति में बदल दिया। उन्होंने ‘गौतम ट्रस्ट’ की स्थापना कर बेटे की पूरी पेंशन और अपनी पेंशन का आधा हिस्सा समाज के उत्थान हेतु समर्पित कर दिया। इस ट्रस्ट के माध्यम से उन्होंने असंख्य जरूरतमंद बच्चों और युवाओं को शिक्षा का उजाला दिया, वहीं ‘गौतम बॉक्सिंग संस्था’ के जरिए खेल प्रतिभाओं को तराशकर उन्हें नई दिशा प्रदान की।

उनकी प्रेरणा और प्रयासों से सैकड़ों युवा सेना, पैरामिलिट्री और अन्य सरकारी सेवाओं में चयनित होकर देश सेवा कर रहे हैं। वे उत्तराखंड सरकार में पूर्व राज्यमंत्री (उपाध्यक्ष, पिछड़ा वर्ग आयोग) के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके थे। 2005 से 2008 तक गोर्खाली सुधार सभा के अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने समाज के उत्थान और एकता को नई मजबूती दी।

गोर्खाली संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए उन्होंने गुरांस सांस्कृतिक कला केंद्र की स्थापना की, जो आज भी उनकी सोच और समर्पण का जीवंत प्रतीक है। वे अनेक सामाजिक संस्थाओं में संरक्षक और वरिष्ठ सलाहकार के रूप में सक्रिय रहकर समाज को दिशा देते रहे।

उनका अंतिम संस्कार टपकेश्वर मोक्षधाम में पूरे सैन्य सम्मान के साथ संपन्न हुआ, जहां 3/4 गोरखा रेजिमेंट के अधिकारियों और जवानों ने उन्हें अंतिम सलामी दी। इस अवसर पर श्रद्धांजलि अर्पित करने गोर्खाली सुधार सभा के अध्यक्ष पदम सिंह थापा, गोर्खाली महिला हरितालिका तीज समिति की अध्यक्षा प्रभा शाह, भारतीय गोरखा परिसंघ के अध्यक्ष पीएन राई, कर्नल डीएस खड़का, उपासना थापा, बलभद्र खलंगा विकास समिति के अध्यक्ष कर्नल विक्रम सिंह थापा, शहीद मेजर दुर्गा मल्ल मैमोरियल ट्रस्ट की अध्यक्षा कमला थापा, उत्तराखंड राज्य नेपाली भाषा समिति के अध्यक्ष मधुसूदन शर्मा, ब्रिगेडियर सीबी थापा, कर्नल डीबी थापा, कर्नल आरएस क्षेत्री, कर्नल संजीव थापा, वरिष्ठ नेत्री गोदावरी थापली, वंदना बिष्ट, ज्योति कोटिया समेत जनप्रतिनिधियों, सैन्य अधिकारियों, समाजसेवियों और गणमान्य व्यक्तियों ने नम आंखों से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी एवं उनकी सुपुत्री नेहा जोशी ने भी उनके गढ़ी कैंट स्थित आवास पर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए।

ब्रिगेडियर गुरूंग अपने पीछे पत्नी वीरमाता पुष्पलता गुरूंग, पुत्री मीनाक्षी गुरूंग त्यागी, दामाद कर्नल रजत त्यागी एवं दो नातियों को छोड़ गए हैं। उनका जीवन त्याग, सेवा और प्रेरणा की ऐसी अमर गाथा है, जो आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करती रहेगी।

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