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Sunday, February 15, 2026


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आयुर्वेद डाक्टरों ने डॉ अरुण कुमार त्रिपाठी को फिर से निदेशक बनाने के खिलाफ खोला मोर्चा

  • आयुर्वेद डाक्टरों ने खोला मोर्चा, कहा- त्रिपाठी को फिर से निदेशक बनाया तो हड़ताल पर चले जाएंगे 800 डाॅक्टर

देहरादून 16 जून, पूर्व निदेशक डॉ अरुण कुमार त्रिपाठी को फिर से निदेशक, आयुर्वेद बनाने की चर्चाओं के बीच राजकीय आयुर्वेंद एवं यूनानी चिकित्सा सेवा संघ ने मोर्चा खोल दिया है। संघ ने आयुष मंत्री डा. हरक सिंह रावत पत्र भेजकर दूसरे संवर्ग के व्यक्ति को निदेशक बनाने का विरोध किया है।
संघ के अध्यक्ष डा. एनएस नपलच्याल और महासचिव डा. हरदेव सिंह रावत ने कहा कि सरकार में बैठा एक नौकरशाह अपने हित साधन के लिए डा. अरुण कुमार त्रिपाठी को फिर से निदेशक बनाने के लिए रात-दिन प्रयास कर रहा है। यह नौकरशाह डा. त्रिपाठी को निदेशक बनाने के लिए मुख्यमंत्री और आयुष मंत्री को भी गुमराह कर रहा है। उन्होंने कहा कि डा. त्रिपाठी न तो राजकीय कर्मचारी हैं और न चिकित्सा संवर्ग से हैं। यही नहीं, शासन स्तर पर इनके खिलाफ जांच लंबित है।
महासचिव डा. रावत ने कहा कि पूर्व में निदेशक के पद पर रहते हुए डा. त्रिपाठी ने 800 चिकित्सकों के एनपीए प्रकरण को दो साल तक लटकाए रखा। यही नहीं, जिन फार्मा कंपनियों की दवाओं के सैंपल फेल हो गए थे, उन्हें त्रिपाठी द्वारा सम्पूर्ण भुगतान किया गया।
डा. रावत ने कहा कि भविष्य में आयुर्वेद विभाग में 1500 डाक्टरों, फार्मासिस्ट, नर्स और चतुर्थ श्रेणी कर्मियों की भर्ती होनी और 300 चिकित्सालयों का बजट भी स्वीकृत होना है। लेकिन, डा. त्रिपाठी के निदेशक रहते यह दोनों कार्य पारदर्शिता से नहीं हो सकते हैं।
संघ ने चेतावनी दी कि यदि अन्य संवर्ग के व्यक्ति को निदेशक बनाया गया तो सभी चिकित्सक कार्यबष्किार और आमर अनशन के लिए मजबूर होंगे।

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