देहरादून 17 मार्च। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने आज लोक भवन में प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के मीडिया एवं जनसंचार विभागों के विभागाध्यक्षों एवं डीन के साथ बैठक की। बैठक में “एआई युग और डिजिटल सूचना पारिस्थितिकी तंत्र में मीडिया शिक्षाः चुनौतियाँ, नैतिकता और अवसर” विषय पर विचार-विमर्श किया गया। बैठक को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि आज के समय में एआई और डिजिटल मीडिया ने सूचना देने और पाने के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है, इसलिए मीडिया शिक्षा को भी समय के अनुसार बदलना जरूरी है। उन्होंने कहा कि मीडिया केवल खबर देने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह समाज की सोच और धारणा को प्रभावित करता है। इसलिए मीडिया शिक्षा का उद्देश्य सिर्फ अच्छे पत्रकार बनाना नहीं, बल्कि जिम्मेदार नागरिक तैयार करना भी होना चाहिए। राज्यपाल ने कहा कि आज के समय में फेक न्यूज और गलत जानकारी बड़ी चुनौती बन गई है। इससे निपटने के लिए छात्रों को सही प्रशिक्षण देना जरूरी है। उन्होंने विश्वविद्यालयों से कहा कि अपने पाठ्यक्रम में एआई, डेटा एनालिटिक्स, डिजिटल सुरक्षा और फैक्ट-चेकिंग जैसे विषय शामिल करें। इस अवसर पर राज्यपाल ने विभागाध्यक्षों से कहा कि वे पत्रकारों के हितों को ध्यान में रखते हुए उनकी आर्थिक स्वतंत्रता को मजबूत बनाने के उपायों पर भी विचार करें। उन्होंने कहा कि पत्रकारों के लिए स्टार्टअप और नवाचार को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, जिससे उनकी आत्मनिर्भरता बढ़े और मीडिया क्षेत्र में नए अवसर सृजित हो सकें। उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालयों और मीडिया संस्थानों को इस दिशा में मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और सहयोग प्रदान करने की दिशा में कार्य करना चाहिए, ताकि पत्रकारों को बदलते समय के अनुरूप और अधिक सशक्त बनाया जा सके। राज्यपाल ने कहा कि वर्तमान समय में तेजी से हो रहे परिवर्तनों को समझना और उसी के अनुरूप स्वयं को ढालना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग राष्ट्र और समाजहित में किया जाना चाहिए तथा इसके माध्यम से आमजन की भलाई सुनिश्चित करने के प्रयास किए जाने चाहिए। राज्यपाल ने कहा कि एआई के सदुपयोग के लिए व्यापक स्तर पर जागरूकता आवश्यक है, ताकि अधिक से अधिक लोग इसका सही दिशा में उपयोग कर सकें। राज्यपाल ने कहा कि भविष्य में भी इस बैठक का नियमित रूप से आयोजन किया जाता रहेगा, ताकि इस विषय पर निरंतर संवाद और सुधार की प्रक्रिया जारी रह सके। राज्यपाल ने कहा कि इस तरह की चर्चाओं से मीडिया शिक्षा को नई दिशा मिलेगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस बैठक में हुए मंथन से सकारात्मक और सार्थक परिणाम सामने आएंगे। दून विश्वविद्यालय के सहयोग से आयोजित इस बैठक में विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए डीन एवं विभागाध्यक्षों ने वर्तमान समय में एआई के बढ़ते प्रभाव के बारे अपने-अपने विचार रखते हुए कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) अब मीडिया और शिक्षा दोनों के स्वरूप को तेजी से बदल रहा है। ऐसे में इसे नजरअंदाज करने के बजाय समझदारी के साथ अपनाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि एआई को एक उपकरण के रूप में उपयोग किया जाना चाहिए, न कि उस पर पूर्ण निर्भरता विकसित की जाए। प्रतिभागियों ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि विद्यार्थियों को एआई के सही और जिम्मेदार उपयोग के लिए तैयार करना बेहद आवश्यक है। एआई के बढ़ते प्रभाव के बीच फेक न्यूज और भ्रामक सूचनाओं का प्रसार एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है, जिसे रोकने के लिए मजबूत फैक्ट-चेकिंग व्यवस्था विकसित करना जरूरी है। उन्होंने सुझाव दिया गया कि मीडिया शिक्षा के पाठ्यक्रम में एआई, फैक्ट-चेकिंग और डिजिटल नैतिकता को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए। इसके साथ ही विभिन्न विश्वविद्यालयों में विद्यार्थियों के लिए एक्सचेंज प्रोग्राम संचालित करने का भी सुझाव दिया गया। प्रतिभागियों ने यह भी कहा कि विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित न रखकर उन्हें व्यावहारिक रूप से सक्षम बनाया जाना जरूरी है ताकि वे समाज में मीडिया साक्षरता और जागरूकता फैलाने में भूमिका निभा सकें। बैठक में स्वदेशी दृष्टिकोण के अनुरूप एआई टूल्स विकसित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया, जिससे भारतीय संदर्भ और जरूरतों के अनुसार मीडिया क्षेत्र को सशक्त बनाया जा सके। बैठक में अपर सचिव श्री राज्यपाल श्रीमती रीना जोशी, संयुक्त निदेशक सूचना डॉ. नितिन उपाध्याय, एचओडी मीडिया एंड मास कम्युनिकेशन दून विश्वविद्यालय प्रो. राजेश कुमार, उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय के प्रो. राकेश रयाल, यूपीईएस विश्वविद्यालय के प्रो. अमरेश झा, ग्राफिक एरा हिल विश्वविद्यालय की प्रो. ताहा सिद्दीकी, डीबीएस ग्लोबल विश्वविद्यालय के प्रो. जयवीर सिंह, उत्तरांचल विश्वविद्यालय के प्रो. कार्तिकेय गौड़, देव भूमि उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय के प्रो. रवि शंकर उपाध्याय, कोर विश्वविद्यालय के प्रो. पराग रंजन, सुभारती विश्वविद्यालय के प्रो. शील शुक्ला, एसजीआरआर विश्वविद्यालय के प्रो. आशीष कुलश्रेष्ठ, स्पर्श हिमालय विश्वविद्यालय की प्रो. पूजा डबास, तुलास इंस्टीट्यूट के प्रो. तौसिफ इकबाल उपस्थित रहे।




