एस.के.एम. न्यूज सर्विस
देहरादून, 05 अप्रैल। कृषि विभाग, पंजाब द्वारा agricultural Technology Management agency ( ATMA) परियोजना के तहत फाजिल्का जिले की स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के लिए कृषि प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान, देहरादून में दो दिवसीय प्रशिक्षण एवं एक्सपोजर विजिट कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को जैविक खेती, प्राकृतिक खेती तथा कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन की व्यावहारिक एवं तकनीकी जानकारी प्रदान कर उन्हें सशक्त बनाना था। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागी महिलाओं ने IATR, देहरादून के विभिन्न प्रशिक्षण इकाइयों, प्रदर्शन प्लॉटों का भ्रमण किया और टिकाऊ तथा पर्यावरण-अनुकूल कृषि पद्धतियों का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त किया। प्राकृतिक खेती पर विशेष फोकस करते हुए विशेषज्ञों ने कम्पोस्ट निर्माण, जैव उर्वरकों का उपयोग, प्राकृतिक कीट एवं रोग प्रबंधन तथा मृदा स्वास्थ्य सुधार जैसी महत्वपूर्ण तकनीकों पर विस्तृत व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। महिलाओं को रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के विकल्प के रूप में प्राकृतिक खेती अपनाने के लाभों के बारे में जागरूक किया गया, जिससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहे और पर्यावरण संरक्षित हो। कार्यक्रम में मशरूम उत्पादन एवं मूल्य संवर्धन पर एक विशेष सत्र आयोजित किया गया। इसमें महिलाओं को सूखे मशरूम, मशरूम पाउडर, मशरूम अचार, सूप पाउडर तथा अन्य मूल्य संवर्धित उत्पादों की तैयारी, प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, संरक्षण, ब्रांडिंग और विपणन की तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया। इन कौशलों से उत्पादों की शेल्फ लाइफ बढ़ेगी और बाजार में बेहतर मूल्य प्राप्त हो सकेगा, जिससे वे स्वरोजगार की ओर अग्रसर हो सकेंगी। महिला सशक्तिकरण के इस कार्यक्रम की अगुवाई श्रीमती ज्योति बाला, आत्मा परियोजना प्रभारी, फाजिल्का, पंजाब ने की। उन्होंने महिलाओं के समूह का नेतृत्व करते हुए उन्हें इस प्रशिक्षण में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रेरित किया और कहा कि ऐसी पहलें ग्रामीण महिलाओं को कृषि क्षेत्र में उद्यमिता की ओर प्रोत्साहित करती हैं। कार्यक्रम के समापन पर प्रमाण-पत्र वितरण समारोह आयोजित किया गया, जिसमें श्री अमित उपाध्याय, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, IATR, देहरादून ने पूर्व ACF मनमोहन सिंह के साथ संयुक्त रूप से प्रतिभागी महिलाओं को प्रमाण-पत्र प्रदान किए। इस अवसर पर श्री अमित उपाध्याय ने कहा, “प्राकृतिक खेती न केवल मिट्टी, पानी और पर्यावरण को बचाती है, बल्कि महिलाओं जैसे छोटे उद्यमियों को आत्मनिर्भर बनाने का मजबूत माध्यम भी है। हम IATR में ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को आधुनिक तकनीकों से जोड़कर उन्हें सशक्त बनाना चाहते हैं, ताकि वे अपने क्षेत्र में जैविक एवं प्राकृतिक खेती को अपनाकर स्वरोजगार स्थापित कर सकें।” कार्यक्रम में सुश्री रियासाना, डॉ. विनोद कुमार ओझा, श्रीमती लतिका राणा, सुश्री वैशाली थापा, श्री नवीन नौटियाल एवं श्री नागेश के मार्गदर्शन में व्यावहारिक प्रदर्शन एवं तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। प्रतिभागी महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपने क्षेत्रों में जैविक एवं प्राकृतिक खेती तथा मशरूम आधारित उद्यमिता अपनाने की रुचि व्यक्त की। यह कार्यक्रम महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।




