24.2 C
Dehradun
Sunday, September 13, 2026


spot_img

फैसला रिजर्व, फिर भी गणेश जोशी ने किया याचिका खारिज होने का दावा; याचिकाकर्ता ने उठाए सवाल

देहरादून। उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी आय से अधिक संपत्ति से जुड़े मामले को लेकर एक बार फिर चर्चा में हैं। उत्तराखंड हाई कोर्ट में इस मामले की सुनवाई पूरी हो चुकी है और अदालत ने 8 सितंबर 2026 को फैसला सुरक्षित रख लिया था। हालांकि, इसके तीन दिन बाद 11 सितंबर को गणेश जोशी ने मीडिया के सामने दावा किया कि हाई कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी है और उन्हें मामले में राहत मिली है।

मामले के ई-कोर्ट्स केस स्टेटस और उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, फिलहाल इस मामले में फैसला सुरक्षित है। ऐसे में अदालत की ओर से अंतिम निर्णय सुनाया जाना अभी बाकी है। मंत्री के दावे के बाद याचिकाकर्ता विकेश सिंह नेगी ने सवाल उठाते हुए इसे न्यायपालिका की गरिमा से जुड़ा गंभीर विषय बताया है।

8 सितंबर को सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित

गणेश जोशी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोपों को लेकर याचिकाकर्ता विकेश सिंह नेगी ने हाई कोर्ट में आपराधिक पुनरीक्षण याचिका दाखिल की थी। मामले में अब तक कई तारीखों पर सुनवाई और आदेश जारी हुए हैं।

केस रिकॉर्ड के अनुसार, 12 जून 2025 को पहला आदेश, 23 जुलाई 2025 को दूसरा आदेश और 1 अगस्त 2025 को तीसरा आदेश दर्ज किया गया। इसके बाद 1 सितंबर 2026 को अगली महत्वपूर्ण सुनवाई हुई।

मामले में अंतिम बहस 8 सितंबर 2026 को न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की अदालत में हुई। इस दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता नलिन सौन, राज्य सरकार की ओर से संक्षिप्त धारक मनोज भट्ट और प्रतिवादी की ओर से अधिवक्ता मनीषा भंडारी अदालत में मौजूद रहे। सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया।

कानूनी प्रक्रिया में ‘जजमेंट रिजर्व’ होने का अर्थ है कि अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुन ली हैं, लेकिन अंतिम फैसला अभी सुनाया नहीं गया है। इसलिए फैसला सुनाए जाने तक याचिका को खारिज या स्वीकार किया हुआ नहीं माना जाता।

गणेश जोशी ने क्या कहा?

फैसला सुरक्षित होने के बाद 11 सितंबर को गणेश जोशी ने मीडिया के सामने दावा किया कि हाई कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी है। उन्होंने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि याचिका सख्त टिप्पणियों के साथ खारिज की गई है।

जोशी ने अपने बयान में कहा कि उन्हें ऑर्डर की जानकारी उनके मोबाइल पर मिली और इसके बाद उन्होंने मीडिया को इसकी जानकारी दी। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन और जनता के भरोसे का भी जिक्र किया।

याचिकाकर्ता विकेश नेगी ने उठाए सवाल

मंत्री के इस दावे पर याचिकाकर्ता विकेश सिंह नेगी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। नेगी ने सवाल उठाया कि जब हाई कोर्ट ने 8 सितंबर को फैसला सुरक्षित रखा था और अंतिम निर्णय अभी सार्वजनिक रूप से सुनाया नहीं गया है, तो मंत्री को याचिका खारिज होने की जानकारी कैसे मिली।

नेगी ने कहा कि यदि अदालत का फैसला अभी सुनाया जाना बाकी है, तो मंत्री द्वारा पहले ही याचिका खारिज होने का दावा करना न्यायपालिका की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि मंत्री को फैसले की जानकारी पहले ही मिल गई थी, तो आदेश की प्रति या उसकी जानकारी उन्हें किस माध्यम से मिली।

बयान के बाद बढ़ा राजनीतिक विवाद

मंत्री के बयान और याचिकाकर्ता की प्रतिक्रिया के बाद मामला राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। विपक्ष और याचिकाकर्ता की ओर से इस बात पर सवाल उठाए जा रहे हैं कि जब हाई कोर्ट का फैसला अभी सुनाया जाना बाकी है, तब किसी पक्ष की ओर से पहले ही परिणाम घोषित करना उचित है या नहीं।

हालांकि, इस पूरे विवाद में एक बात स्पष्ट है कि उपलब्ध आधिकारिक केस स्टेटस के अनुसार अदालत का अंतिम फैसला अभी आना बाकी है। इसलिए गणेश जोशी को मिली कथित ‘क्लीन चिट’ या याचिका खारिज होने की स्थिति पर अंतिम स्थिति हाई कोर्ट के औपचारिक फैसले के बाद ही स्पष्ट होगी।

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

spot_img
spot_img

Stay Connected

22,024FansLike
0FollowersFollow
0SubscribersSubscribe

Latest Articles

- Advertisement -spot_img