देहरादून/दिल्ली, 12 अप्रैल। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा), नई दिल्ली के तत्वावधान में उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, नैनीताल द्वारा आयोजित दो दिवसीय नॉर्थ ज़ोन रीजनल कॉन्फ्रेंस का रविवार को भव्य समापन हुआ। इस वर्ष सम्मेलन का विषय “Enhancing Access to Justice” तथा मुख्य थीम “Justice Beyond Barriers: Rights, Rehabilitation & Reform for the Most Vulnerable” रही।
समापन समारोह में न्यायमूर्ति सूर्यकांत, भारत सरकार के कानून एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह तथा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं राष्ट्रगान के साथ हुआ, जबकि उत्तराखंड उच्च न्यायालय के माननीय मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता ने स्वागत संबोधन प्रस्तुत किया।
सम्मेलन में उत्तराखंड के सभी जनपदों के जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों के अध्यक्ष, सचिव एवं न्यायिक अधिकारियों ने भाग लिया। तकनीकी सत्रों के माध्यम से न्याय तक आसान पहुंच, वंचित वर्गों के अधिकारों के संरक्षण और न्याय प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।
इस दौरान वन अधिकार अधिनियम 2006 के क्रियान्वयन, जेल सुधार, विचाराधीन बंदियों के अधिकार, एसिड अटैक पीड़ितों के पुनर्वास तथा महिलाओं व बच्चों के विधिक अधिकारों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई।
कार्यक्रम में “न्याय मित्र पोर्टल” का शुभारंभ किया गया, जिससे आमजन ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर त्वरित न्याय प्राप्त कर सकेंगे। साथ ही नालसा के कार्यकारी अध्यक्ष न्यायमूर्ति विक्रम नाथ द्वारा ई-बुकलेट का विमोचन भी किया गया।
राज्यपाल द्वारा एंटी-ड्रग जागरूकता वीडियो लॉन्च करते हुए युवाओं को नशे के दुष्प्रभाव से बचने का संदेश दिया गया। इसके अतिरिक्त दूरस्थ क्षेत्रों में विधिक सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों को यूटिलिटी वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया।
यह सम्मेलन न्याय व्यवस्था को अधिक समावेशी, सुलभ और मानव-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ, जो विशेष रूप से वंचित और कमजोर वर्गों तक न्याय पहुंचाने के उद्देश्य को मजबूत करता है।




