देहरादून 11 फरवरी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक छह प्रस्ताव आए। जिसमें श्रम विभाग से संबंधित पेमेंट ऑफ बोनस एक्ट 2020 को वापस लिया गया। कोविड के समय ये यह प्रस्ताव आया था। उद्योगों को सरप्लस होने पर ही बोनस का प्रावधान किया गया था। अब चूंकि केंद्रीय कानून 1965 का लागू है। राष्ट्रपति भवन भेजा गया था लेकिन मिला नहीं। इसे वापस लिया जा रहा है। अब 1965 वाला केंद्रीय कानून लागू रहेगा। जिससे सबको बोनस मिलेगा। बैठक में ईएसआई डॉक्टर के लिए नियमावली। उत्तराखंड एम्पोलयी स्टेट सर्विस स्कीम 2026 पर मुहर लगी। ईएसआई डॉक्टर के 94 पद होंगे। मेडिकल ऑफिसर के पद पर भर्ती होगी लेकिन पहले प्रमोशन के पद नहीं थे। मेडिकल ऑफिसर के 76, एसिस्टेंट डायरेक्टर के 11, लेवल 12 के 6 पद, एडिशनल डायरेक्टर लेवल 13 के एक पद को मंजूरी मिली। गृह विभाग से जुड़े प्रस्ताव के सबंध में कहा गया कि 2022 में एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स का गठन किया गया था। मुख्यालय या जिला स्तर की फोर्स काम करेगी लेकिन अब इसके लिए अलग से 22 पद सृजित करने को मंजूरी। पुलिस उपाधीक्षक का एक व अन्य। ये सभी मुख्यालय स्तर के पद हैं। 2024 में उत्तराखंड कारागार एक्ट पास हुआ था, जिसमें बार-बार अपराध करने वालों को आदतन अपराधी माना गया था। अब आदतन अपराधी को पूर्व के एक्ट के हिसाब से माना जाएगा। इसके अलावा वन विभाग में दैनिक श्रमिकों के 893 में से बाकी 589 को भी न्यूनतम वेतनमान दिया जाएगा। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य योजना के साथ ही मुख्यमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम योजना भी चल रही है। तय हुआ कि जब तक केंद्र की योजना 2025-26 तक चलेगी। तब तक मुख्यमंत्री वाली योजना भी जारी रहेगी।
राज्य मंत्रिमंडल के निर्णय के बाद उत्तराखंड में ड्रग फ्री मुहिम और तेज होगी। अभी तक एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स में पुलिस फोर्स से प्रतिनियुक्ति पर कार्मिक लिए जा रहे थे। टास्क फोर्स का गठन 2022 में किया गया था। अब इस फोर्स के लिए अलग से ढांचा खड़ा करने की शुरूआत हुई है। इस क्रम में राज्य मुख्यालय में पहली बार 22 पदों का सृजन किया गया है। एक पुलिस उपाधीक्षक, दो ड्रग निरीक्षक, एक निरीक्षक, दो उपनिरीक्षक, चार मुख्य आरक्षी और आठ आरक्षी, दो आरक्षी चालक समेत कुल 22 पद सृजित किए जाएंगे।
-राज्य मंत्रिमंडल ने वन विभाग में कार्यरत दैनिक श्रमिकों को न्यूनतम वेतनमान दिए जाने का निर्णय लिया है। इस संबंध में मंत्रिमंडलीय उप-समिति ने सरकार को संस्तुति दी थी। इस आधार पर सरकार ने 589 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को न्यूनतम 18 हजार रूपये वेतन देने का निर्णय लिया है। वन विभाग/वन विकास निगम में कार्यरत दैनिक श्रमिकों की कुल संख्या 893 है, जिसमें से 304 श्रमिकों को पूर्व से ही न्यूनतम वेतनमान का लाभ प्राप्त हो रहा है।
कैबिनेट ने कर्मचारी राज्य बीमा योजना (ईएसआई) के अंतर्गत चिकित्सा सेवा संवर्ग के चिकित्सा अधिकारियों और उच्चतर पदों की सेवा-शर्तों के निर्धारण के संबंध में भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इस क्रम में “उत्तराखण्ड कर्मचारी राज्य बीमा योजना, श्रम चिकित्सा सेवा नियमावली, 2026” को प्रख्यापित किया गया है, जिसके तहत कुल 94 पद होंगे। इनमें 76 चिकित्सा अधिकारी, 11 सहायक निदेशक, छह संयुक्त निदेशक और एक अपर निदेशक का पद शामिल है। इससे पहले, ईएसआई के ढांचे में एक सीएमओ और 13 चिकित्सा अधिकारी के पद शामिल थे।
-खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा केंद्र प्रायोजित योजना प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना की कार्यान्वयन अवधि को एक वर्ष के लिए 31 मार्च 2026 (वित्तीय वर्ष 2025-26) तक बढ़ाया गया है। इस क्रम में राज्य मंत्रिमंडल ने राज्य सेक्टर के अंतर्गत संचालित मुख्यमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना की कार्यान्वयन अवधि को भी वित्तीय वर्ष 2025-26 (दिनांक 31 मार्च 2026) तक विस्तारित करने का निर्णय लिया है। साथ ही यह भी निर्णय लिया गया है कि भविष्य में यदि भारत सरकार के स्तर पर इस योजना की अवधि विस्तारित होती है, तो राज्य में भी इसे विस्तारित माना जाएगा।
-राज्य मंत्रिमंडल ने उत्तराखण्ड कारागार और सुधारात्मक सेवाएं (संशोधन) अधिनियम, 2026 के प्रारूपण के संबंध में भी निर्णय लिया है। सर्वाेच्च न्यायालय के आदेशों में यह निर्देशित किया गया है कि कारागार नियमावलियों/मॉडल प्रिजन मैनुअल में प्रयुक्त “आदतन अपराधी (Habitual offenders)” शब्द की परिभाषा संबंधित राज्य विधानमंडलों द्वारा अधिनियमित कानूनों के अनुरूप होनी चाहिए। संशोधन विधेयक को आगामी सत्र में उत्तराखण्ड विधान सभा के समक्ष पुनः स्थापित किए जाने को राज्य मंत्रिमंडल ने अनुमोदन प्रदान कर दिया है।
-कोविड-19 वैश्विक महामारी के दौरान उद्योगों को राहत प्रदान किए जाने के उद्देश्य से बोनस संदाय (उत्तराखण्ड संशोधन) विधेयक, 2020 के अंतर्गत यह प्रावधान किया गया था कि नियोजक के पास आवंटनीय अधिशेष (Allocable Surplus) उपलब्ध होने की स्थिति में ही कर्मचारियों को न्यूनतम बोनस का भुगतान किया जाएगा। उक्त विधेयक में किए गए प्रावधानों के संबंध में श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा असहमति व्यक्त की गई। साथ ही वर्तमान में कोविड-19 महामारी जैसी परिस्थितियां विद्यमान न होने तथा गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रस्तावित विधेयक को राष्ट्रपति की अनुमति के बिना विधायी एवं संसदीय कार्य विभाग, उत्तराखण्ड शासन को उपलब्ध कराए जाने के कारण विधेयक को आगे बढ़ाया जाना संभव नहीं हो पाया। उपरोक्त तथ्यों के दृष्टिगत बोनस संदाय (उत्तराखण्ड संशोधन) विधेयक, 2020 को यथास्थिति विधान सभा से वापस लिए जाने का निर्णय राज्य सरकार द्वारा लिया गया है।




