पौड़ी। जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने जिला कार्यालय के एनआईसी कक्ष में वनाग्नि रोकथाम को लेकर बैठक की और सभी विभागों को समन्वित व ज़मीनी स्तर पर प्रभावी कार्यवाही के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि समय से पहले की गई तैयारी से वनाग्नि से होने वाली क्षति को कम किया जा सकता है और इसमें जनसहभागिता जरूरी है। उन्होंने वन विभाग को निर्देश दिए कि जनपद से ग्राम स्तर तक बनी समितियों को सक्रिय रखा जाए। आग की रोकथाम हेतु उपकरणों की जांच, पर्याप्त मानव संसाधन, फायर वाचरों की तैनाती सुनिश्चित की जाए। आग लगाने वालों पर कड़ी कार्रवाई हो तथा सभी वन प्रभागों में कंट्रोल रूम स्थापित कर उनका व्यापक प्रचार किया जाए। डीएम ने सभी कार्यालयों व संस्थानों के अधिकारियों को अपने आसपास घास-फूस, कूड़ा-करकट और झाड़ियों की नियमित सफाई रखने के निर्देश दिए। साथ ही संवेदनशील व अतिसंवेदनशील स्थलों के आसपास गांवों-कस्बों की प्राथमिकता के आधार पर मैपिंग कराने को कहा। युवा कल्याण अधिकारी को महिला व युवा मंगल दलों तथा ग्राम प्रहरियों को सक्रिय रखने के निर्देश दिए गए। बैठक में बताया गया कि जनपद का 61.38 प्रतिशत क्षेत्र वनाच्छादित है। वनाग्नि का खतरा 15 फरवरी से 15 जून के बीच सबसे अधिक रहता है। जनपद में 5795.50 हेक्टेयर क्षेत्र अति संवेदनशील तथा 70717 हेक्टेयर क्षेत्र संवेदनशील श्रेणी में है। वर्तमान में 260 क्रू स्टेशन स्थापित किए गए हैं। प्रभागीय वनाधिकारी महातिम यादव ने बताया कि जनपद में वनाग्नि रोकथाम हेतु कुल 09 कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं। क्रू स्टेशन पर्याप्त संख्या में बनाए जा चुके हैं तथा फायर वाचरों की तैनाती की प्रक्रिया जारी है। ग्राउंड लेवल पर मॉक ड्रिल और शैक्षणिक संस्थानों के माध्यम से प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। साथ ही लीसा विदोहन की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है। बैठक में मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. शिवमोहन शुक्ला, अधीक्षण अभियंता प्रवीण सैनी, जिला




