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Wednesday, February 25, 2026


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धर्म ध्वजा जब नारी के हाथ में होती है तो धरती पर राम कथा उतरती है

देहरादून। त्रेता युग में जब भगवान भोलेनाथ सती जी को कुम्भज ऋषि के आश्रम में राम कथा सुनने के लिए ले गए तो अनमने मन से सती जी ने कथा तो सुनी किंतु भगवान राम की प्रभुता पर शंका कर उनकी परीक्षा लेने वन में सीता जी का रूप धर चली गई और भगवान राम द्वारा उनको पहचान लेने से क्षुब्ध सती जी को दक्ष प्रजापति के द्वारा आयोजित यज्ञ कुंड में स्वाह होना पड़ा लेकिन जब पुनर्जन्म के बाद पार्वती जी भगवान शंकर को राम कथा सुनाने ले गईं तो इस धरा को राम कथा जैसी अद्भुत दिव्य कथा मिली यह बात आज झाझरा में बद्री केदार रामलीला समिति द्वारा आयोजित राम कथा में बतौर मुख्य अतिथि प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष संगठन सूर्यकांत धस्माना ने कही। उन्होंने कहा कि भगवान राम को मर्यादा पुरुषोत्तम इसलिए कहा गया कि उन्होंने मानव रूप में अवतरित हो कर जिन मर्यादाओं का पालन पूरे जीवन पर्यंत किया उसका अनुसरण सभी पुरुष करें। श्री धस्माना ने कहा कि राम कथा मनुष्य को जीवन में जीने का तरीका सिखाती है और इस कथा का सबसे बड़ा संदेश और सार यह है कि सत्य अटल है सत्य हमेशा रहता है और असत्य कितना भी धन बल शाली क्यों ना हो वो सत्य से जीत नहीं सकता। श्री धस्माना ने रामलीला समिति के पदाधिकारियों द्वारा उनके सम्मान के लिए आभार जताते हुए कहा कि वे हमेशा उनके विश्वास को कायम रखने का प्रयास करेंगे । कार्यक्रम में समिति के संरक्षक सैन सिंह, अध्यक्ष शिशुपाल सिंह रावत, उपाध्यक्ष सचिन बड़वाल, सचिव दिलीप पंवार व संचालक सुशील गोदियाल ने श्री धस्माना को शाल पहना कर व स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया महिलाओं ने श्री धस्माना को तिलक कर पुष्प गुच्छ भेंट किए। श्री धस्माना ने दीप प्रज्वलित कर व रिबन काट कर रामलीला का शुभारंभ किया।

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